बिहार के कई जिलों में बाढ़ से तबाही, मंत्री बोले-राहत और बचाव कार्य तेज

बिहार के कई जिलों में बाढ़ से तबाही, मंत्री बोले-राहत और बचाव कार्य तेज
बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंडक नदी के उफान और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इसको लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।

पटना, 29 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंडक नदी के उफान और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इसको लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने बाढ़ की स्थिति पर कहा, "कभी गंडक नदी तबाही मचाती है तो कभी नेपाल से आने वाले पानी का असर होता है। बाढ़ एक आपदा है और पूरा बिहार इससे जूझ रहा है। हर साल तबाही होती है। किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो जाता है और साल भर में जो कुछ भी बनाया जाता है, वह दोबारा नष्ट हो जाता है। बिहार में खासकर छह-सात जिलों में हालात बहुत मुश्किल हो जाते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री कल खुद स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। पहले भी बाढ़ पीड़ितों की मदद की गई थी, इस बार भी सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए खड़ी है।"

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बाढ़ के स्थायी समाधान पर बात की। उन्होंने कहा, "जब नेपाल में ग्लेशियर टूटते हैं और वहां से पानी नीचे आता है तो तराई क्षेत्र होने के कारण बिहार पर स्वाभाविक रूप से खतरा अधिक होता है। हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि नेपाल के साथ मिलकर एक ऊंचा बांध बनाया जाए, ताकि बिहार और देश दोनों को बचाया जा सके। भारत सरकार ने अब इस मांग को मान लिया है। ऊंचे बांध पर चर्चा होगी और एक बार जब यह बन जाएगा तो निश्चित रूप से बिहार की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।"

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मौजूदा स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि यह भीषण बाढ़ के दूसरे चरण की स्थिति है। उन्होंने कहा, "लगभग 5.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और करीब छह जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। हालांकि एहतियाती उपाय किए गए हैं और तैयारियां पहले से पूरी हैं, जिनमें तटबंधों की सुरक्षा, राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रोटोकॉल शामिल हैं।"

बता दें कि हर साल मानसून में नेपाल से आने वाले पानी और राज्य की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बिहार के कोसी, गंडक और बागमती बेल्ट के जिलों में बाढ़ का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इस बार भी बाढ़ से खेती को भारी नुकसान पहुंचा है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया है और अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

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Created On :   29 Sept 2026 12:23 PM IST

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