बिहार नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो के आईआईआरएस का नोडल सेंटर, छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोर्स का मौका

बिहार नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो के आईआईआरएस का नोडल सेंटर, छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोर्स का मौका
बिहार के नालंदा जिले स्थित नालंदा विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) का नोडल सेंटर नामित किया गया है। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) जैसे उन्नत विषयों में विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम करने का अवसर मिलेगा। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पूरी तरह निःशुल्क होंगे।

राजगीर, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के नालंदा जिले स्थित नालंदा विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) का नोडल सेंटर नामित किया गया है। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) जैसे उन्नत विषयों में विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम करने का अवसर मिलेगा। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पूरी तरह निःशुल्क होंगे।

विश्वविद्यालय की ओर से मंगलवार को जारी एक प्रेस बयान के अनुसार, आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (डीएलपी) के माध्यम से विभिन्न शैक्षणिक विषयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए छात्रों को किसी एक विशेष विभाग तक सीमित नहीं रहना होगा। विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इस पहल के तहत विद्यार्थियों को इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाओं के साथ अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी के संसाधनों के आकलन और भौगोलिक आंकड़ों के विश्लेषण जैसी तकनीकों की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।

विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2026 में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, उनकी अवधि और निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर में देखी जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को पंजीकरण की स्वीकृति और अन्य संबंधित जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क करना होगा। उन्हें इस कार्यक्रम के लिए नामित समन्वयक बनाया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस साझेदारी से विद्यार्थियों को पारंपरिक अकादमिक अध्ययन के साथ अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे उनके कौशल विकास और शोध क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह पहल नालंदा विश्वविद्यालय की अंतर्विषयक शिक्षा, शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही, इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के शैक्षणिक कार्यक्रम से जुड़ने के कारण विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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Created On :   13 Oct 2026 7:34 PM IST

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