चुनाव आयोग का फैसला, अब एक व्यक्ति 10 से ज्यादा फॉर्म-7 से आपत्ति नहीं कर सकेगा
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दायर किए जाने वाले फॉर्म-7 को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने एक व्यक्ति द्वारा थोक में आपत्तियां दाखिल करने पर रोक लगाने के लिए नई सीमा तय कर दी है। इस संबंध में आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि उसके संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं जहां व्यक्तिगत मतदाताओं द्वारा बिना ठोस आधार के थोक में फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इससे जिन मतदाताओं पर आपत्ति की गई है, उन्हें अनावश्यक असुविधा हो रही है और फील्ड स्तर के अधिकारियों पर काम का बोझ भी बढ़ रहा है।
आयोग के अनुसार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 13(2) के तहत किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटाने का आवेदन फॉर्म-7 में होना चाहिए और वह केवल उसी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसका नाम पहले से उसी क्षेत्र की सूची में हो।
चुनाव आयोग ने बताया कि एसआईआर अवधि के लिए मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए को थोक में आवेदन देने की अनुमति है, लेकिन उनके लिए भी सीमा तय है। बीएलए ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले एक दिन में बीएलओ को 50 से अधिक फॉर्म और उसके बाद 10 से अधिक फॉर्म जमा नहीं कर सकता।
वहीं व्यक्तिगत मतदाता के लिए मतदाता सूची मैनुअल 2023 में पहले से प्रावधान है कि किसी एक व्यक्ति द्वारा थोक में पेश किए गए दावे-आपत्तियां, जिनमें डाक से भेजे गए आवेदन भी शामिल हैं, स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। अगर एक ही व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्तिकर्ता बनता है तो ईआरओ को व्यक्तिगत रूप से क्रॉस-वेरिफिकेशन करना होता है।
आयोग ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम में एक व्यक्ति एक बार में 6 आवेदन ही कर सकता है, लेकिन फिजिकल फॉर्म की संख्या परिभाषित नहीं थी और यह ईआरओ के विवेक पर छोड़ दिया गया था, जिससे परेशानी हो रही थी।इसी को देखते हुए आयोग ने नई सीमा तय की है। अब दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान कोई एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही दाखिल कर सकेगा। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन के दौरान यह सीमा प्रति माह 5 आवेदन की होगी। यह नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर लागू होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम 17 के तहत अधूरे या तय प्रारूप में नहीं भरे गए आवेदनों को ईआरओ खारिज कर देगा। फॉर्म-7 पर आपत्तिकर्ता के मूल हस्ताक्षर जरूरी होंगे, मोहर से काम नहीं चलेगा। साथ ही ईआरओ को आवेदक की प्रामाणिकता की जांच करनी होगी।
अगर शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई गई तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत जानबूझकर झूठा बयान देने वाले आवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   9 Oct 2026 11:50 PM IST












