चुनाव आयोग में नियमित संवाद और बैठकों से सुलझते थे मतभेद पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी

चुनाव आयोग में नियमित संवाद और बैठकों से सुलझते थे मतभेद  पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों और बैठकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोग में नियमित रूप से बैठकें होती थीं और किसी भी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता था।

नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों और बैठकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोग में नियमित रूप से बैठकें होती थीं और किसी भी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता था।

एसवाई कुरैशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जब कोई चुनाव नहीं होता था, तब भी चुनाव आयोग के सदस्य सप्ताह में कम से कम दो बार बैठक करते थे। चुनाव के दौरान बैठकों की आवृत्ति बढ़ जाती थी तथा सदस्य लगभग रोजाना मिलते थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का काम एक गंभीर संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सदस्यों के बीच नियमित संवाद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह कहती है कि उनके कार्यकाल के दौरान भी आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होते थे, तो यह बात सही हो सकती है। उन मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाती थी। यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती थी, तो बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता था।

कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संस्था है और तीनों सदस्यों के मतों का समान महत्व होता है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त की राय बाकी सदस्यों से अलग भी हो जाए, तो संस्थागत निर्णय तीनों सदस्यों के मतों के आधार पर लिया जाता है। अंतिम निर्णय को चुनाव आयोग का सामूहिक निर्णय माना जाता है।

हाल में हुई चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसमें सामने आए नोट्स का जिक्र करते हुए कुरैशी ने सवाल उठाया कि यदि अब आयोग की ओर से नियमित बैठकें करने, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) जारी करने और अधिकारियों को सदस्यों की बात सुनने की बात कही जा रही है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पहले ऐसा नहीं होता था?

उन्होंने कहा कि इन बातों से आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। भविष्य में व्यवस्था सुधारने की बात अपनी जगह है, लेकिन यह भी बताया जाना चाहिए कि अतीत में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई या उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग में पारदर्शिता, नियमित संवाद और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में आपसी समन्वय और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   28 Sept 2026 11:17 PM IST

Tags

Next Story