सीएम सुवेंदु से ईश्वर चंद्र विद्यासागर के रिश्तेदार की मांग, जयंती को 'बांग्ला शिक्षा दिवस' घोषित करें

सीएम सुवेंदु से ईश्वर चंद्र विद्यासागर के रिश्तेदार की मांग, जयंती को बांग्ला शिक्षा दिवस घोषित करें
पश्चिम बंगाल में महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर के परिवार के एक सदस्य ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। ईश्वर चंद्र विद्यासागर के परिवार के सदस्य अमिताव बनर्जी ने 'जनता दरबार' में पहुंचकर विद्यासागर की जयंती को 'बांग्ला शिक्षा दिवस' के रूप में मनाने और उनके पैतृक गांव वीरसिंघा के सर्वांगीण विकास की अपील की है।

कोलकाता, 10 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर के परिवार के एक सदस्य ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। ईश्वर चंद्र विद्यासागर के परिवार के सदस्य अमिताव बनर्जी ने 'जनता दरबार' में पहुंचकर विद्यासागर की जयंती को 'बांग्ला शिक्षा दिवस' के रूप में मनाने और उनके पैतृक गांव वीरसिंघा के सर्वांगीण विकास की अपील की है।

अमिताव बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि बचपन में ईश्वर चंद्र विद्यासागर मील के पत्थरों को देखकर अंग्रेजी के अंक सीख गए थे।

उन्होंने कहा कि हम जो बांग्ला भाषा सीखते हैं, वह सब ईश्वर चंद्र विद्यासागर की ही देन है। आज हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करते हैं, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश काल में ही महिलाओं के लिए 35 स्कूल खोलकर शिक्षा का अभूतपूर्व विकास किया था। उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का सबसे सही तरीका यही है कि उनके जन्मदिन को 'बांग्ला शिक्षा दिवस' के रूप में घोषित किया जाए।

अमिताव बनर्जी ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जन्मस्थान वीरसिंघा गांव की बदहाल स्थिति पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि आज भी गांव में बुनियादी विकास नदारद है और वहां ठीक से बिजली तक नहीं जलती है।

उन्होंने कनेक्टिविटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोलकाता से वीरसिंघा जाना हो तो बस या ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है। जब गंगा नदी के नीचे मेट्रो रेल चल सकती है, तो हावड़ा से वीरसिंघा की सीधी कनेक्टिविटी क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने गोघाट से पंसकुड़ा होते हुए वीरसिंघा तक नई रेल लाइन बिछाने की मांग की।

रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ईश्वर चंद्र विद्यासागर को अपना गुरु माने जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह बोलपुर शांतिनिकेतन और रवींद्रनाथ ठाकुर से जुड़े स्थलों का विकास हुआ है, वैसा विकास वीरसिंघा का क्यों नहीं होना चाहिए?

उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर जनता दरबार में लोग अपने निजी कामों जैसे नौकरी, ट्रांसफर, मेडिकल हेल्प या संपत्ति विवाद को लेकर पहुंचते हैं, लेकिन मैं अपने किसी निजी काम के लिए नहीं, बल्कि बेटी पक्ष से ईश्वर चंद्र विद्यासागर के रिश्तेदार होने के नाते सिर्फ और सिर्फ महान शिक्षाविद् के सम्मान और उनके गांव के विकास के लिए मुख्यमंत्री के पास पहुंचा था।

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Created On :   10 Aug 2026 6:50 PM IST

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