ई-रिक्शा चलाने, सब्जी बेचने से लेकर देश के लिए मेडल जीतने तक का सफर, झंडू बोले- मेहनत का फल मिला

ई-रिक्शा चलाने, सब्जी बेचने से लेकर देश के लिए मेडल जीतने तक का सफर, झंडू बोले- मेहनत का फल मिला
भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीते ब्रॉन्ज मेडल को अपनी वर्षों की मेहनत और लगन को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचने जैसे मुश्किल सफर ने सफल होने के उनके इरादे को और मजबूत किया।

ग्लासगो, 25 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीते ब्रॉन्ज मेडल को अपनी वर्षों की मेहनत और लगन को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचने जैसे मुश्किल सफर ने सफल होने के उनके इरादे को और मजबूत किया।

पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के कुछ ही देर बाद भावुक झंडू ने 'आईएएनएस' को बताया कि उन्हें हमेशा से भरोसा था कि उनकी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। झंडू ने कहा, "मैंने अपना गुजारा करने के लिए ई-रिक्शा चलाया, सब्जियां बेचीं और बहुत संघर्ष किया। हालांकि, मैंने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा। मुझे हमेशा विश्वास था कि एक दिन मैं अपने देश के लिए जरूर मेडल जीतूंगा।"

दो अलग-अलग ग्रुप में हुई इस स्पर्धा में झंडू ने ग्रुप बी में 130.9 का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने युगांडा के डेनिस म्बाजीरा (114.1) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9) को स्पष्ट अंतर से पीछे छोड़कर पदक की दावेदारी मजबूत की। हालांकि, कुल संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 के सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 के लिफ्ट के बूते सिल्वर मेडल जीता, जबकि झंडू का 130.9 का प्रयास उन्हें ब्रॉन्ज मेडल जिताने के लिए काफी साबित हुआ। झंडू सिल्वर मेडल जीतने से महज 0.1 प्वाइंट पीछे रह गए।

प्लेटफॉर्म पर उनके शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी प्रेरणादायक कहानी भी चर्चा का विषय रही, जिसने गेम्स में भारत के लिए मेडल जीतने वाले इस खिलाड़ी के पीछे छिपे साहस और दृढ़ संकल्प को उजागर किया। झंडू का ब्रॉन्ज मेडल वर्षों के त्याग और लगातार कड़ी मेहनत का इनाम है, जिसमें उन्होंने आर्थिक तंगी का सामना करते हुए भी अपने खेल के सपनों को पूरा करना जारी रखा।

झंडू ने इस मेडल के साथ ही ग्लासगो में भारत का मेडल टैली में खाता भी खोला। साधारण पृष्ठभूमि से उभरते हुए झंडू की यह सफलता एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अपनी उपलब्धि पर बात करते हुए झंडू ने कहा कि यह मेडल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी का है जिन्होंने मुश्किल दिनों में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने उन्हें भविष्य में और बड़े सम्मान हासिल करने के लिए प्रेरित किया है।

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Created On :   25 July 2026 1:00 PM IST

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