संस्थागत और राजनीतिक स्तर से ही निकल सकता है कलाकारों की समस्या का समाधान दीपक पराशर
मुंबई, 25 जनवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में पिछले कुछ महीनों से शिफ्ट को लेकर बहस छिड़ी हुई है। हाल ही में मां बनने के बाद दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे की शिफ्ट की मांग रखी, जिससे एक बार फिर ये मुद्दा गर्मा गया है। इसी कड़ी में वरिष्ठ अभिनेता दीपक पराशर ने आईएएनएस से खास बातचीत में इंडस्ट्री की अंदरूनी सच्चाइयों और संघर्षरत कलाकारों की स्थिति पर खुलकर बात की है। साथ ही पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मदद मांगी।
आईएएनएस से बात करते हुए दीपक पराशर ने कहा, ''दीपिका पादुकोण की ओर से उठाया गया आठ घंटे की शिफ्ट का मुद्दा अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन इसका सीधा फायदा उन कलाकारों को नहीं मिलता जो रोज काम की तलाश में भटकते हैं। टॉप पर बैठे कलाकारों के लिए समय, पैसा और काम कभी समस्या नहीं होते। उनके पास अपने नियम तय करने की आजादी होती है, लेकिन जो कलाकार छोटे रोल करते हैं या रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनकी जिंदगी इन फैसलों से नहीं बदलती।''
उन्होंने कहा, ''इंडस्ट्री उन्हीं सितारों के इर्द-गिर्द घूमती है जो बॉक्स ऑफिस और टीआरपी के लिहाज से सेलिंग फैक्टर होते हैं।''
इस बातचीत में दीपक पराशर ने सवाल उठाया कि क्या बड़े सितारे कभी जरूरतमंद कलाकारों के हक में खुलकर सामने आएंगे।
उन्होंने कहा, ''इंडस्ट्री के बड़े नाम शायद ही कभी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जो लोग सुविधाजनक स्थिति में हैं, वे अपनी सुरक्षित दुनिया से बाहर निकलकर संघर्ष कर रहे कलाकारों की लड़ाई लड़ने से बचते हैं। यही वजह है कि सामूहिक और मजबूत आंदोलन अब तक खड़ा नहीं हो पाया है।''
उन्होंने कहा, ''अब सीनियर कलाकार इस दिशा में पहल कर रहे हैं। यह पहली बार है जब पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे, और उपासना सिंह जैसे अनुभवी कलाकार एक मंच पर आए हैं। इन सभी ने चार से पाँच दशकों तक इंडस्ट्री में काम किया है और अब वे अपने अनुभव के आधार पर जरूरतमंद कलाकारों की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।''
दीपक पराशर ने बताया कि उन्होंने 46 साल तक इंडस्ट्री में काम किया है और अब वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को वही संघर्ष न झेलना पड़े जो उन्होंने और उनके साथियों ने देखा है।
दीपक पराशर ने कोरोना महामारी के समय मिली मदद को भी याद किया। उन्होंने कहा, ''उस कठिन दौर में कई बड़े सितारों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए आगे बढ़कर सहायता की थी। ऋतिक रोशन की मदद से जरूरतमंद कलाकारों को राशन और जरूरी सुविधाएं मिल सकीं। सोनू सूद ने बड़े पैमाने पर लोगों की मदद की, जबकि सलमान खान ने अपनी संस्था के जरिए सहयोग किया। शाहरुख खान और अक्षय कुमार ने भी आर्थिक और सामाजिक मदद पहुंचाई। उस समय व्यक्तिगत स्तर पर बहुत सहयोग मिला, लेकिन यह मदद किसी स्थायी व्यवस्था का विकल्प नहीं बन सकी।''
उन्होंने चिंता जताई कि इंडस्ट्री में कोई मजबूत और एकीकृत सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन नहीं है। पहले फिल्म इंडस्ट्री सीमित थी, लेकिन अब टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जुड़ने से इसका दायरा बहुत बड़ा हो गया है। अलग-अलग माध्यमों में काम करने वाले कलाकारों को एक मंच पर लाना और उनकी समस्याओं पर एकजुट होकर आवाज उठाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी कारण बड़े स्तर पर सामूहिक कार्रवाई अब तक संभव नहीं हो पाई है।
दीपक पराशर ने उम्मीद जताई कि अब इस समस्या का समाधान केवल संस्थागत और राजनीतिक स्तर से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा, ''हमारी आखिरी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल जैसे लोगों से है, जो नीति और व्यवस्था के स्तर पर कुछ ठोस कदम उठा सकते हैं और हमारी मदद कर सकते हैं।''
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Created On :   25 Jan 2026 1:18 PM IST












