दिल्ली 1 नवंबर से लागू होने वाले वाहन प्रतिबंध पर बार एसोसिएशन चिंतित, मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

दिल्ली  1 नवंबर से लागू होने वाले वाहन प्रतिबंध पर बार एसोसिएशन चिंतित, मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर 1 नवंबर से प्रस्तावित वाहन प्रतिबंध के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायालय कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से छूट देने का अनुरोध किया है।

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर 1 नवंबर से प्रस्तावित वाहन प्रतिबंध के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायालय कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से छूट देने का अनुरोध किया है।

अपने पत्र में हरिहरन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने बीएस-6 मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों के दिल्ली की सड़कों पर चलने पर 1 नवंबर 2026 से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है। इसके तहत दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को ऐसे वाहनों को जब्त करने का अधिकार भी दिया गया है।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि बीएस-6 उत्सर्जन मानक वर्ष 2020 में लागू किए गए थे। वहीं, परिवहन विभाग और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के तहत पुराने मानकों वाले वाहनों को भी निर्धारित अवधि तक चलाने की अनुमति दी गई है। डीजल वाहनों के लिए यह अवधि 10 वर्ष और पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष तक निर्धारित है।

डीएचसीबीए अध्यक्ष ने कहा कि बड़ी संख्या में वकील दिल्ली के बाहर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और आसपास के अन्य शहरों से रोजाना अदालतों में आते-जाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आवास महंगा होने के कारण कई वकील, न्यायाधीश और न्यायालय कर्मचारी भी पड़ोसी शहरों में रहते हैं।

पत्र में कहा गया है कि न्यायाधीश, अधिवक्ता और न्यायालय कर्मचारी न्याय वितरण जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।

हरिहरन ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे दिल्ली सरकार के समक्ष यह मामला उठाकर न्यायपालिका से जुड़े लोगों को प्रस्तावित प्रतिबंध से छूट दिलाने के लिए हस्तक्षेप करें।

पत्र के अंत में उन्होंने इस विषय पर सकारात्मक विचार करने की अपेक्षा जताते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का आभार व्यक्त किया है।

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