धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंचे उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंचे उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंचे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

मुंबई, 18 सितंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंचे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन करेंगे। दोपहर में राधाकृष्णन लोनावला जाएंगे और कैवल्यधाम के गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह में शामिल होंगे। शाम को उपराष्ट्रपति पुणे के नेहरू स्टेडियम स्थित श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच पर पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण में शामिल होंगे।

इससे पहले गुरुवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्होंने कहा था कि 17 सितंबर, 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के समापन का प्रतीक है, जब सितंबर 1948 की घटनाओं और 'ऑपरेशन पोलो' के बाद तत्कालीन हैदराबाद राज्य का विलय भारतीय संघ में हुआ।

उन्होंने कहा था कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल एक ऐतिहासिक तारीख को याद करने का दिन नहीं है बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एकजुट रखते हैं। वे सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा था कि हैदराबाद की कहानी उन भारी चुनौतियों को दर्शाती है जिनका सामना एक नए राष्ट्र ने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों से निकले लोगों को एक साथ लाने में किया था। यह राज-कौशल, साहस और बलिदान की कहानी थी, जिसके बाद एक संवैधानिक लोकतंत्र बनाने का बड़ा और निरंतर चलने वाला काम आया, जिसमें हर नागरिक का समान स्थान हो।

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Created On :   18 Sept 2026 10:23 AM IST

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