ट्रंप की तारीफ पर शिवसेना (यूबीटी) ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल, कहा-भाजपा का एजेंट बन गया है चुनाव आयोग

ट्रंप की तारीफ पर शिवसेना (यूबीटी) ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल, कहा-भाजपा का एजेंट बन गया है  चुनाव आयोग
शिवसेना (यूबीटी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की चुनाव पद्धति की तारीफ को अपराधी द्वारा दूसरे को चरित्र प्रमाणपत्र बताया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में गुरुवार को छपे संपादकीय में कहा गया कि पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र में मतदाता बढ़ा-घटाकर चुनाव जीते गए।

मुंबई, 20 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की चुनाव पद्धति की तारीफ को अपराधी द्वारा दूसरे को चरित्र प्रमाणपत्र बताया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में गुरुवार को छपे संपादकीय में कहा गया कि पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र में मतदाता बढ़ा-घटाकर चुनाव जीते गए।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि महाराष्ट्र में 'एसआईआर' के खेल में सभी विपक्षी दलों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। महाराष्ट्र के 2 करोड़ मतदाताओं के नाम अब हटा दिए गए हैं। मतदाता सूची में भ्रष्टाचार और घोटाला ही भाजपा का नया हथियार है। इस हथियार को अब कुंद करना होगा।

पार्टी ने कहा, "अगर डोनाल्ड ट्रंप को भारत की चुनाव पद्धति आदर्श और पारदर्शी लगती है, तो उन्हें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनकी पूरी मशीनरी के साथ अमेरिका ले जाकर वहां चुनाव करवाने चाहिए। ज्ञानेश कुमार, ट्रंप को उनकी मर्जी के मुताबिक चुनाव करवाकर दिखाएंगे और भारत की महान लोकशाही की तरह अमेरिका की लोकशाही का भी बंटाधार कर देंगे, इसमें हमें कोई शक नहीं है।"

संपादकीय में कहा गया कि ट्रंप ने भारत की चुनाव पद्धति की प्रशंसा की है। इसकी जोरदार चर्चा भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने शुरू कर दी है। यह एक अपराधी द्वारा दूसरे अपराधी को चरित्र प्रमाणपत्र देने जैसा है।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों की विशेष गहन जांच (एसआईआर) अभियान के जरिए 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं को अयोग्य ठहराने का बड़ा काम चुनाव आयोग अंतिम चरण में ले आया है। यह लोकशाही के लिए खतरनाक है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जटिल और भ्रम पैदा करने वाली है।

पार्टी ने कहा कि जिस राज्य में स्कूलों के हेडमास्टर शराब पीकर गिर पड़ते हैं, बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए रास्ते नहीं हैं, आश्रमशाला की लड़कियां सांप के काटने से मर जाती हैं, गरीबों को अपना जरूरी काम करवाने के लिए कदम-कदम पर रिश्वत देनी पड़ती है, उस राज्य का पिछड़ा हुआ मतदाता मतदाता पुनरीक्षण की लड़ाई में कहां टिक पाएगा?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के समय 80 लाख मतदाताओं को हटाया गया और उसी के बल पर भाजपा सत्ता में आई। बिहार में भी वही खेला गया।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के दौरान अचानक 42 लाख मतदाता बढ़ाकर चमत्कार कर दिया गया। ये 42 लाख मतदाता कहां से आए? उनका आगे-पीछे का ब्योरा महाराष्ट्र का चुनाव आयोग नहीं दे सका।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची घोटाले का सच बताया है। मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लिकेट मतदाताओं को संरक्षण देना और उनके नाम पर शाम को फर्जी मतदान करवाना, ऐसे उद्योग तब चुनाव के समय करवाए गए। इसे कोई आदर्श चुनाव पद्धति नहीं माना जा सकता। अब फिर से राज्य के 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का अस्तित्व खतरे में आ गया है। इस पर आयोग का कहना है कि 75.52 लाख मतदाताओं ने सूची में नाम दर्ज कराने में उदासीनता दिखाई। 17 लाख मतदाताओं के नाम डुप्लिकेट होने के कारण हटा दिए गए। अब एक स्वच्छ, पवित्र मतदाता सूची प्रकाशित होगी।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में लाखों डुप्लिकेट मतदाताओं ने अलग-अलग जगहों पर मतदान किया। इसके सबूत देने के बावजूद चुनाव आयोग या कोर्ट ने दखल नहीं लिया। ठाणे लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार राजन विचारे ने लाखों डुप्लिकेट, फर्जी मतदाताओं के सबूत चुनाव आयोग और न्यायालय को दिए, लेकिन यह सब दीवार पर सिर मारने जैसा साबित हुआ।

पार्टी ने कहा कि 'एसआईआर' का काम करने के लिए राज्य में एक लाख बूथ लेवल अधिकारी 'बीएलओ' मैदान में उतरे। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी श्री चोकलिंगम कहते हैं, "सभी 'बीएलओ' ने सराहनीय काम किया है। हर बीएलओ ने अपने क्षेत्र के घरों में तीन-तीन बार मुलाकात की। उन्होंने बहुत मेहनत की।" यह सब ठीक है, लेकिन मुख्य सवाल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता का है। क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा है? यही असली सवाल है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी चोकलिंगम पर है, लेकिन देश का मुख्य चुनाव आयोग आदर्श और निष्पक्ष नहीं रहा है। वह भाजपा और अमित शाह का एजेंट है।

संपादकीय में कहा गया कि पश्चिम बंगाल, बिहार के विधानसभा चुनावों में उनकी धांधली उजागर हो चुकी है। इसलिए महाराष्ट्र में 'एसआईआर' के खेल में सभी विपक्षी दलों को बहुत सावधान रहना होगा। महाराष्ट्र के 2 करोड़ मतदाताओं के नाम अब हटा दिए गए हैं। उनमें करीब 35 लाख मृत मतदाता हैं।

पार्टी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हजारों जिंदा मतदाताओं को मृत दिखाकर मतदान से वंचित किया गया। बिहार में एक विशेष धर्म के हजारों मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया और कहा गया कि "आप जिंदा हैं इसका 4 पीढ़ियों का सबूत लाओ तभी आप मतदाता माने जाओगे" - ऐसा आदेश दिल्ली के चुनाव 'तुगलकों' ने दिया।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा नए-नए तरीके ढूंढती रहती है। वह कई बार विरोधियों के ध्यान में नहीं आते। इस बार बड़ी संख्या में 'जेन-जी' मतदाताओं के हटाए जाने का डर है। क्योंकि नए मतदाताओं के इस बड़े वर्ग ने मोदी-शाह-फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसलिए उनका वोट देने का अधिकार छीनने का प्रयास जरूर होगा। इसे नाकाम करना होगा।

पार्टी ने कहा कि पुणे, नागपुर, नाशिक, मुंबई, रायगढ़, छत्रपति संभाजीनगर के युवाओं ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किए। इसलिए इन शहरों के युवा वर्ग को और अधिक सावधान रहना होगा। मतदाता सूची में भ्रष्टाचार और घोटाला ही भाजपा का नया हथियार है। इस हथियार को अब कुंद करना होगा।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   20 Aug 2026 8:53 AM IST

Tags

Next Story