'फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटेंगे', मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान पर संजय निरुपम

फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटेंगे, मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान पर संजय निरुपम
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 30 जून से शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। इस अभियान के तहत फर्जी, दोहराए गए और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे, जबकि सभी वैध भारतीय नागरिकों को मतदान का पूरा अधिकार मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे और सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा।

मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 30 जून से शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। इस अभियान के तहत फर्जी, दोहराए गए और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे, जबकि सभी वैध भारतीय नागरिकों को मतदान का पूरा अधिकार मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे और सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा।

संजय निरुपम ने कहा कि आज 30 जून से भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार देश के कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह अभियान कई राज्यों में लागू किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें एक फॉर्म (ईएफ) उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं से अपेक्षा की जाएगी कि वे सात दिनों के भीतर फॉर्म भरकर वापस जमा करें, जिसके बाद अधिकारी सत्यापन करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वास्तविक और वैध भारतीय मतदाता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि यह मतदाता सूची शुद्धिकरण का तीसरा चरण है और इसके माध्यम से फर्जी मतदाताओं, एक से अधिक जगह नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं और मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। इस प्रक्रिया से केवल वैध नागरिक ही मतदाता सूची में बने रहेंगे और आगामी चुनावों में अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे पर टिप्पणी करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ राज्य के दौरे से लौटे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन छह लोकसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां से उनके सांसद शिवसेना छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इस दौरे का उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के यवतमाल दौरे के अगले ही दिन यूबीटी के 15 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया। इससे स्पष्ट हो गया कि उद्धव ठाकरे की अपील का उनकी पार्टी के संगठन पर कोई असर नहीं पड़ा।

सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को यूबीटी के लिए बड़ा झटका बताते हुए निरुपम ने कहा कि विधान परिषद सदस्य और पूर्व विधायक सचिन भाऊ अहीर ने शिवसेना में उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। सचिन अहीर कामगारों के बड़े नेता हैं और उनके आने से यूबीटी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ कमजोर हो गया है।

निरुपम ने दावा किया कि सचिन अहीर को पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से उद्धव ठाकरे की पार्टी में इसलिए लाया गया था ताकि आदित्य ठाकरे को वर्ली विधानसभा सीट पर चुनाव जिताने में मदद मिल सके। उस समय उन्हें पुरस्कार के तौर पर विधान परिषद सदस्य बनाया गया था। अब जबकि सचिन अहीर शिवसेना में शामिल हो गए हैं, वर्ली में यूबीटी की स्थिति कमजोर होगी और भविष्य में आदित्य ठाकरे के लिए वहां से चुनाव जीतना मुश्किल है।

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Created On :   30 Jun 2026 7:35 PM IST

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