जीएमटी को एमएसटी से बदलने के प्रस्ताव पर राशिद अल्वी का पलटवार, बोले- 'नाम बदलने से विकास नहीं होता'

जीएमटी को एमएसटी से बदलने के प्रस्ताव पर राशिद अल्वी का पलटवार, बोले- नाम बदलने से विकास नहीं होता
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) को 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (एमएसटी) से बदलने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। इस पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी।

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) को 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (एमएसटी) से बदलने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। इस पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी।

राशिद अल्वी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार में बैठे लोग जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पहले खुद को बदलना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी के जो सदस्य कुर्ता-पजामा पहनते हैं, उन्हें विदेश से अपनाई गई चीजों को छोड़ देना चाहिए, जैसे कि ईरान से अपनाई गई चीजें। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में होने वाली बहसें अभी अंग्रेजी में होती हैं, उनके बजाय भारतीय भाषाओं, संस्कृत और हिंदी में होनी चाहिए। उन्हें धोती पहननी चाहिए और सभी सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का पालन करना चाहिए। सिर्फ समय बदलने से कुछ हासिल नहीं होगा।"

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि उन्हें एमएसटी प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ नाम बदलने से विकास होता है। उन्होंने कहा, "जब सत्ता उनके हाथ में होती है तो वे सड़कों, शहरों और यहां तक कि मुगल गार्डन के नाम बदलने में व्यस्त रहते हैं। फिर भी वे खुद कुछ भी रचनात्मक काम नहीं करते। वे बस दूसरों द्वारा बनाई गई चीजों का नाम बदल देते हैं और सोचते हैं कि यही विकास है। अब वे समय भी बदलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सबसे पहले खुद को बदलना चाहिए, जैसे अपनी जीवनशैली, अपने पहनावे को।"

राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रतीकात्मक बदलावों पर ज्यादा जोर दे रही है, जबकि असली मुद्दों जैसे शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि एमएसटी का प्रस्ताव भी उसी प्रतीकात्मक राजनीति का हिस्सा लगता है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जीएमटी की जगह एमएसटी अपनाने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि उज्जैन प्राचीन काल से ही समय गणना का केंद्र रहा है और अब भारतीय सनातन परंपरा के अनुरूप वैश्विक समय प्रणाली बदलनी चाहिए। इस प्रस्ताव को कई संत-महंतों और हिंदुत्ववादी संगठनों ने समर्थन दिया है।

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Created On :   4 April 2026 11:52 PM IST

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