वैश्विक तनाव और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के दबाव में टूटा सोने-चांदी का भाव, सिल्वर करीब 2 प्रतिशत फिसला

वैश्विक तनाव और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के दबाव में टूटा सोने-चांदी का भाव, सिल्वर करीब 2 प्रतिशत फिसला
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश की बदलती धारणा के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी साफ दिखाई दिया, जहां सोना 1.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे फिसल गया, जबकि चांदी 2.30 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई।

मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश की बदलती धारणा के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी साफ दिखाई दिया, जहां सोना 1.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे फिसल गया, जबकि चांदी 2.30 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया, जबकि हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करती रही। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा, जिससे निवेशकों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

घरेलू वायदा बाजार में सबसे ज्यादा दबाव चांदी पर देखने को मिला। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का भाव पिछले कारोबारी सत्र के बंद स्तर 2,32,419 रुपए प्रति किलोग्राम से टूटकर 2,27,931 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक आ गया। इस दौरान चांदी में 4,488 रुपए यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह चांदी 1.61 प्रतिशत यानी 3,734 रुपए की गिरावट के साथ 2,28,685 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि व्यापक कमोडिटी कमजोरी और मुनाफावसूली के कारण चांदी में अधिक दबाव देखने को मिला।

इस बीच, सोने की कीमतों में भी कमजोरी बनी रही। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 1.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया, और दिन के कारोबार में यह अपने पिछले बंद 1,54,262 रुपए से 0.55 प्रतिशत यानी 858 रुपए फिसलकर 1,53,404 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

वहीं खबर लिखे जाने तक सोना 0.38 प्रतिशत यानी 581 रुपए की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमतों में नरमी और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने भी सोने की चाल को प्रभावित किया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में सोना और चांदी दोनों की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि किसी भी नए वैश्विक तनाव या ब्याज दर कटौती की उम्मीद मजबूत होने की स्थिति में सोना और चांदी दोबारा सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड में लगातार बढ़ोतरी कीमती धातुओं के लिए प्रमुख नकारात्मक कारक बनी हुई है। 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 19 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि अन्य सरकारी बॉन्ड यील्ड भी कई दशकों के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ऊंचे बॉन्ड यील्ड निवेशकों को सुरक्षित और निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित करते हैं, जिससे सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें क्रमशः लगभग 85.5 डॉलर और 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना मजबूत होती है। इसका दबाव भी कीमती धातुओं पर दिखाई दे रहा है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और समुद्री जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसी वजह से निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयरमैन के संभावित संकेतों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की मौद्रिक नीति की दिशा स्पष्ट हो सके।

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Created On :   19 Aug 2026 12:41 PM IST

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