उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया की अहम भूमिका, बड़े स्तर पर बदलाव के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की भागीदारी जरूरी एफएआई

उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया की अहम भूमिका, बड़े स्तर पर बदलाव के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की भागीदारी जरूरी एफएआई
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि भारत के उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया के लिए बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं और यह देश की आयात निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन उर्वरक उद्योग के लिए ग्रीन अमोनिया एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि भारत के उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया के लिए बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं और यह देश की आयात निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन उर्वरक उद्योग के लिए ग्रीन अमोनिया एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में डॉ. चौधरी ने कहा कि भारत सरकार और उर्वरक क्षेत्र दोनों को उम्मीद है कि यदि पारंपरिक ग्रे अमोनिया के विकल्प के रूप में ग्रीन अमोनिया का बड़े पैमाने पर विकास किया जाता है, तो उर्वरक उत्पादन के लिए विदेशों पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

डॉ. चौधरी ने आईएएनएस से कहा, "ग्रीन अमोनिया का भविष्य काफी संभावनाओं से भरा है, लेकिन इसके व्यापक उपयोग के लिए लागत से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना होगा।"

उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में सरकार की नीतिगत सहायता और प्रोत्साहन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, ताकि ग्रीन अमोनिया और पारंपरिक अमोनिया के बीच लागत के अंतर को कम किया जा सके।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और तकनीक अधिक परिपक्व होगी, वैसे-वैसे इसकी लागत भी प्रतिस्पर्धी बन सकेगी, जिससे उद्योग में इसका अपनाना आसान होगा।

उर्वरक क्षेत्र के भविष्य पर बात करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा, "ग्रीन अमोनिया और हरित ऊर्जा-आधारित समाधान विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।"

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या सहकारी संस्थाओं पर नहीं छोड़ी जा सकती। बड़े स्तर पर बदलाव के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उनके अनुसार, जब सरकार, उद्योग, सहकारी संस्थाएं और अनुसंधान संगठन एक साथ मिलकर काम करेंगे, तभी इस क्षेत्र की पूर्ण क्षमता का लाभ उठाया जा सकेगा।

डॉ. चौधरी ने कहा कि ग्रीन अमोनिया इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए केवल निवेश ही नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तथा मजबूत औद्योगिक ढांचा आवश्यक होगा।

उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों की साझेदारी से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें व्यावसायिक स्तर पर लागू करने में भी तेजी आएगी।

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Created On :   25 Sept 2026 7:21 PM IST

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