गुजरात की जैव विविधता में वृद्धि, शोधकर्ताओं ने ‘रुंजिया रिपेंस’ पौधे की एक नई किस्म खोजी
गांधीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (जीईईआर-गीर फाउंडेशन) के शोधकर्ताओं ने ‘रुंजिया रिपेंस’ की एक नई सफेद फूलों वाली किस्म खोजी है और गुजरात के पादप जगत में एक नया पौधा जोड़ा गया है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, “इस नए पहचाने गए पौधे की किस्म का नाम ‘रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा’ रखा गया है, जिसमें ‘अल्बा’ नाम पौधे के सफेद रंग के फूलों का संदर्भ देता है। इस पौधे की नई किस्म छोटाउदेपुर जिले में नर्मदा कैनाल कमांड एरिया में जैव-विविधता के अध्ययन के दौरान दिखाई दी। मैं इस शोध के लिए गीर फाउंडेशन के शोधकर्ताओं को बधाई देता हूं।”
मोढवाडिया ने आगे कहा, “यह अध्ययन मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में ‘नर्मदा कैनाल सिस्टम का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (जैव विविधता, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता) पर प्रभाव’ नामक प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में किया गया था।”
गुजरात के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, “मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के वन विभाग ने हमारी अनमोल वनस्पति सृष्टि के संरक्षण के लिए विभिन्न शोध पहल और कदम उठाए हैं। इस प्रकार के शोध के कारण हमें अपने राज्य में मौजूद जैव-विविधता की समृद्धि के बारे में पता चलता है और इससे भविष्य में इसके संरक्षण के लिए नई दिशा मिलती है।”
बता दें कि गीर फाउंडेशन गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
गीर फाउंडेशन के निदेशक बीपी पति (आईएफएस) ने कहा, “हमारे शोधकर्ताओं ने जैव-विविधता के अध्ययन के दौरान छोटाउदेपुर जिले से इस पौधे की नई किस्म के तीन परिपक्व पौधों का विवरण दर्ज किया। इस पौधे का नमूना एकत्रित करके और उसे सूखाकर नमूने को गीर फाउंडेशन हर्बेरियम (जीईईआरएफ) में जमा किया गया।”
गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा, “‘रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा’ की पहचान गुजरात की जैविक समृद्धि को बढ़ाती है और नर्मदा कैनाल सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर इकोलॉजिकल सर्वेक्षणों के महत्व को उजागर करती है।”
इस शोध टीम में गीर फाउंडेशन के डॉ. राजकुमार यादव, नमन नायक, विनेश गामित, अमित कुमार नायक (आईएफएस) और बी.पी. पति (आईएफएस) शामिल हैं।
इस शोध से जुड़े डॉ. राजकुमार यादव ने कहा, “पौधे की यह नई किस्म आम तौर पर पाए जाने वाले ‘रुंजिया रिपेंस’ से अलग है, जिसमें नीले और बैंगनी रंग के फूल होते हैं। इस नई किस्म में बिल्कुल सफेद कोरोला (फूल की पंखुड़ियां), मध्यम आकार के फ्लावर स्पाइक्स (पुष्प दंड या पुष्पक्रम) तथा हरे और सफेद पॉइंटेड टिप्स वाले छोटे ब्रेक्ट्स (सहपत्र या पत्तीनुमा संरचना) होते हैं।”
डॉ. राजकुमार यादव ने आगे कहा, “इस शोध को फॉरेस्ट्री के सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘इंडियन फॉरेस्टर’ में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है।”
इस पौधे में फूल आने का समय फरवरी से अप्रैल तक दर्ज किया गया है। बाद में मई से जून तक इसमें फल आते हैं। यह पौधा आम ‘रुंजिया रिपेंस’ से अलग है, जिसमें फूल आने की समय अगस्त से जनवरी तक दर्ज किया गया है।
गीर फाउंडेशन के उप निदेशक अमित कुमार नायक (आईएफएस) ने कहा, “‘रुंजिया रिपेंस’ के मौजूदा नमूनों के साथ विस्तृत मॉर्फोलॉजिकल परीक्षण और तुलना करने के बाद पौधे की पहचान एक नई किस्म के रूप में की गई है। शोधकर्ताओं ने दर्ज किया कि सफेद फूल वाले पौधों में आम तौर पर देखे जाने वाले नीले फूल वाले पौधे के स्वरूप से कुछ मॉर्फोलॉजिकल अंतर दिखते है।”
गीर फाउंडेशन के निदेशक बीपी पति (आईएफएस) ने कहा, “हाल ही में, गीर फाउंडेशन हर्बेरियम को द न्यूयॉर्क बॉटनिकल गार्डन (एनवाईबीजी) द्वारा होस्ट और प्रकाशित किए गए ‘इंडेक्स हर्बेरियोरम’ द्वारा आधिकारिक एक्रोनिम दिया गया है। यह रजिस्ट्री दुनियाभर के शोधकर्ताओं को फाउंडेशन के संग्रह को आसानी से खोजने, संदर्भ देने और उद्धृत करने में सक्षम बनाती है।”
हर्बेरियम नई वनस्पति खोजों के दस्तावेजीकरण में और देशभर के विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए अपने संग्रह को सुव्यवस्थित बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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Created On :   11 Sept 2026 7:34 PM IST












