गुजरात में 63.35 लाख से अधिक किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण कराया, कृषि व्यवस्था हुई डिजिटल
गांधीनगर, 23 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में किसानों के लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था की मजबूत आधारशिला रखी जा रही है। इसके तहत, फार्मर रजिस्ट्री पहल के जरिए किसानों को एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान देने के साथ-साथ उनके भूमि के दस्तावेजों और सरकारी कृषि सेवाओं की पहुंच को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा रहा है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (डीएएम) शुरू किया है। इस पहल के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री को किसानों के एक विश्वसनीय और एकीकृत डिजिटल डेटाबेस के रूप में तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, गुजरात में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के क्रियान्वयन को रफ्तार मिल रही है। गुजरात में अब तक 63.35 लाख से अधिक किसानों का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण हो चुका है। इस पद्धति से किसानों के भूमि के दस्तावेजों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।
राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती एस. रवि ने कहा, ''इस व्यवस्था में किसान की आधार-आधारित पहचान को भूमि के रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाता है। फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसानों को यूनिक फार्मर आईडी दिया जाता है। इस डिजिटल पहचान के माध्यम से किसान अब विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं और सेवाओं का लाभ और भी अधिक सरल, तेज और पारदर्शी तरीके से प्राप्त कर सकते हैं।”
डॉ. जयंती एस. रवि ने आगे कहा, ''यह पहल केवल पंजीकरण की प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है। यह किसानों और सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कृषि सेवाओं के बीच के संबंध को अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा, “पिछले कई वर्षों से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए न केवल अपनी व्यक्तिगत जानकारी, भूमि संबंधित विवरण और पात्रता से जुड़े दस्तावेज बार-बार प्रस्तुत करने पड़ते थे, बल्कि हर बार उनका सत्यापन भी कराने की जरूरत पड़ती थी।”
वाघाणी ने कहा, “फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य विभिन्न कृषि योजनाओं और सेवाओं के लिए उपयोगी हो सके, ऐसी एक सामान्य डिजिटल पहचान बनाकर इस प्रक्रिया में होने वाले कार्यों के दोहराव को खत्म करना है।”
एक बार किसान का पंजीकरण और अनुमोदन होने के बाद उसकी पहचान और भूमि के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से एकीकृत किया जाता है, जिससे एक विश्वसनीय डिजिटल प्रोफाइल तैयार होती है।
यह व्यवस्था किसानों के आवेदनों की प्रक्रिया को आसान बनाती है, लाभार्थी की पहचान और सत्यापन को अधिक सुव्यवस्थित बनाती है और सरकारी सहायता की पहुंच में पारदर्शिता, दक्षता और सटीकता बढ़ाती है।
फार्मर आईडी को एक ऐसे डिजिटल माध्यम से के रूप में विकसित करने का उद्देश्य है, जिसके द्वारा किसान एक ही डिजिटल पहचान के जरिए विभिन्न सरकारी कृषि सेवाओं का लाभ उठा सके।
फार्मर आईडी की पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और किसान-उन्मुख बनाया गया है। किसान अपने मोबाइल फोन से या सरकार समर्थित सेवा केंद्रों की मदद से पंजीकरण करा सकते हैं।
इस प्रक्रिया में आधार प्रमाणीकरण किया जाता है। आधार का सफलतापूर्वक सत्यापन होने के बाद किसान और उसकी भूमि से संबंधित जानकारियां सत्यापित की जाती हैं। फिर किसान की पहचान को सत्यापित भूमि रिकॉर्ड से जोड़कर यूनिक फार्मर आईडी जनरेट किया जाता है। पंजीकरण होने के बाद किसान अपनी जानकारी और उससे जुड़े भूमि के रिकॉर्ड को ऑनलाइन देख सकते हैं।
यदि पंजीकरण के दौरान किसी भूमि का सर्वे नंबर छूट जाता है, तो उसे बाद में अपडेट फार्मर रिक्वेस्ट (यूएफआर) सुविधा के जरिए जोड़ा जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पात्र किसान की सभी जमीनें फार्मर रजिस्ट्री में ठीक तरह से दिखाई दें।
फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण होने से पीएम किसान (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना), मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) / न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत सरकारी खरीदी, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि ऋण जैसी योजनाओं में लाभार्थी की पहचान और सत्यापन आसान हो जाता है।
इसके अलावा, यह व्यवस्था विभिन्न सब्सिडी और कृषि सहायता योजनाओं, डिजिटल कृषि सेवाओं और खेती के लिए आवश्यक इनपुट्स और दूसरी सेवाएं पहुंचाने में भी यह उपयोगी सिद्ध होती है।
इस पूरी पहल का व्यापक उद्देश्य यह है कि किसानों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बार-बार अपनी पहचान और भूमि से संबंधित विवरणों को सत्यापित करने की जरूरत न पड़े।
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Created On :   23 Sept 2026 2:43 PM IST












