ज्ञान-विज्ञान और ध्यान का वैश्विक केंद्र है उज्जैन सीएम मोहन यादव
उज्जैन, 17 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और ध्यान का वैश्विक केंद्र है, जिसे श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा स्थली के तौर पर चुना था।
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में 181 विद्यार्थियों को डिग्रियां, 198 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, एक शोधार्थी को डी-लिट और 88 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियों से सम्मानित किया गया।
कुलाधिपति एवं राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने कहा कि उज्जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्त की और आज वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के पश्चात आप सभी ने समाज के उत्थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है।
विश्वविद्यालय से जो संस्कार आपको मिले हैं, उन्हें जीवन भर स्मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्ट उठाए हैं, इसलिए पढ़-लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाएं, परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना और उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण पत्र पाना नहीं, बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान देकर एक जिम्मेदार नागरिक भी बनना है। इसलिए हम सभी इस बात का हमेशा स्मरण रखें।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केंद्र उज्जैन को भगवान श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्याय प्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है और यहां के विद्यार्थियों के गर्व में वृद्धि हुई है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य का विषय है।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ाएंगे।मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है।
यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह सुमन और पद्म श्री विष्णु श्रीधर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है।
मुख्यमंत्री यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, कृषि अध्ययन शाला के लिए पांच ड्रोन तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।
उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है।
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Created On :   17 March 2026 7:31 PM IST












