सेब के बाद अदाणी एग्री फ्रेश हिमाचल प्रदेश में करेगी चेरी की खरीदारी, बाद में आड़ू और प्लम की भी शुरू होगी खरीद

सेब के बाद अदाणी एग्री फ्रेश हिमाचल प्रदेश में करेगी चेरी की खरीदारी, बाद में आड़ू और प्लम की भी शुरू होगी खरीद
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड (एएएफएल) ने चेरी जैसे फलों सहित स्टोन फ्रूट श्रेणी में कदम रखने की घोषणा की है, और हिमाचल प्रदेश में चेरी की खरीद शुरू करने की योजना बना रही है।

लखनऊ, 9 मई (आईएएनएस)। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड (एएएफएल) ने चेरी जैसे फलों सहित स्टोन फ्रूट श्रेणी में कदम रखने की घोषणा की है, और हिमाचल प्रदेश में चेरी की खरीद शुरू करने की योजना बना रही है।

कंपनी के अनुसार, इस विस्तार से फलों की शेल्फ लाइफ बेहतर होगी, किसानों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा। हिमाचल प्रदेश में एएएफएल के छह केंद्रों पर मौजूद नियंत्रित वातावरण वाले स्टोरेज केंद्रों को चेरी के भंडारण और वितरण के लिए अपग्रेड किया गया है।

गौरतलब है कि एएएफएल हिमाचल प्रदेश में संगठित तरीके से सेब की खरीद, भंडारण और मार्केटिंग करने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल रही है।

एएएफएल के बिजनेस हेड मनीष अग्रवाल ने कहा, "हम आने वाले सीजन से चेरी की खरीद शुरू करेंगे और धीरे-धीरे अन्य स्टोन फ्रूट जैसे आड़ू और प्लम तक कारोबार बढ़ाएंगे। यह हमारी सेब खरीद के अनुभव और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में जारी प्रयासों का हिस्सा है।"

उन्होंने यह बात इस सप्ताह आयोजित 'फ्रूट होराइजन 2026: ग्लोबलाइजिंग इंडिया'स फ्रूट वैल्यू चेन' कार्यक्रम में कही, जिसका आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग और बागवानी विभाग ने मिलकर किया।

कंपनी ने 2006 में 'फार्म-पिक' ब्रांड के तहत काम शुरू किया था। तब से अब तक कंपनी 17,000 से ज्यादा किसानों से 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब खरीद चुकी है। इसके बदले किसानों को करीब 1,500 करोड़ रुपए का सीधा भुगतान किया गया है।

अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश में कुल 25,000 मीट्रिक टन की स्टोरेज क्षमता विकसित की है, जिससे फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

कंपनी गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी कीमत तय करने के लिए मानकीकृत ग्रेडिंग और सॉर्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती है। इससे किसानों की पारंपरिक मंडियों पर निर्भरता कम होती है और उन्हें बेहतर कीमत मिलती है।

कंपनी अपनी 'डिजिटल मंडी' पहल का भी विस्तार कर रही है, जिसके जरिए किसान खरीद केंद्रों पर जाए बिना दूर से ही अपनी उपज बेच सकते हैं। अब इस प्लेटफॉर्म का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।

वर्तमान में कंपनी हिमाचल प्रदेश के कुल सेब उत्पादन का करीब 4 प्रतिशत खरीदती है और अधिक किसानों तक पहुंचने के लिए अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रही है।

एएएफएल, अदाणी ग्रुप की सामाजिक संस्था अदाणी फाउंडेशन के साथ मिलकर बागवानी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास के लिए भी काम कर रही है।

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Created On :   9 May 2026 3:30 PM IST

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