सेबी द्वारा विनियमित संस्थाओं द्वारा एआई का उपयोग करना उनकी स्वयं की जिम्मेदारी है चेयरमैन तुहिन कांत पांडे

सेबी द्वारा विनियमित संस्थाओं द्वारा एआई का उपयोग करना उनकी स्वयं की जिम्मेदारी है चेयरमैन तुहिन कांत पांडे
वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उन्नत प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को स्पष्ट किया है कि सेबी के विनियमन के दायरे में आने वाली सभी संस्थाएं अपने द्वारा उपयोग किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी, चाहे वे इनका विकास स्वयं करें या किसी तीसरे पक्ष से प्राप्त करें।

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उन्नत प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को स्पष्ट किया है कि सेबी के विनियमन के दायरे में आने वाली सभी संस्थाएं अपने द्वारा उपयोग किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी, चाहे वे इनका विकास स्वयं करें या किसी तीसरे पक्ष से प्राप्त करें।

फिक्की यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) की तरफ से मुंबई में आयोजित फिक्की कैपाम 2026 के 23वें संस्करण को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा, "एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग के साथ, सेबी द्वारा विनियमित प्रत्येक संस्था उस एआई या मशीन लर्निंग उपकरण के लिए पूरी तरह जवाबदेह रहेगी जिसका वह उपयोग करती है, चाहे वह आंतरिक रूप से विकसित किया गया हो या बाहरी स्रोत से लिया गया हो।"

उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजारों में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसी उद्देश्य से सेबी ऐसी नियामकीय व्यवस्था विकसित कर रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करे, लेकिन जवाबदेही और पारदर्शिता से समझौता न करे।

सेबी अध्यक्ष ने बताया कि बाजार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी मजबूती का आकलन करने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रणालियों की क्षमता और जोखिम-प्रतिरोधकता को मापने के लिए एक वस्तुनिष्ठ ढांचा तैयार करना है।

उन्होंने कहा, "हम बाजार अवसंरचना संस्थानों के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण प्रणालियों की मजबूती का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।"

पांडे के अनुसार, भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण में टेक्नोलॉजी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि निवेश के अवसरों का विस्तार करने, वित्तपोषण के नए रास्ते बनाने और नियामकीय व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीक का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग आवश्यक है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सेबी की नियामकीय रणनीति संतुलित, अनुपातिक और भविष्य उन्मुख नियमों पर आधारित है, ताकि बाजार का विकास भी हो और निवेशकों के हित तथा बाजार की निष्पक्षता भी सुरक्षित रहे।

सेबी अध्यक्ष ने कहा कि भारत में वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की संस्कृति को और व्यापक तथा गहरा बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) ने बड़ी संख्या में घरेलू परिवारों को बाजार आधारित निवेश से जोड़ा है और इससे भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती बढ़ी है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि अभी भी पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

पांडे ने कहा, "भारत के पूंजी बाजारों में बड़ा परिवर्तन आया है। अब वे केवल आर्थिक गतिविधियों का प्रतिबिंब नहीं हैं, बल्कि स्वयं आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण चालक बन चुके हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था निवेश के नए अवसर पैदा करेगी। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि पूंजी बाजार अधिक गहरे, नवोन्मेषी और व्यापक बनें, जबकि उनकी निष्पक्षता, सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बनी रहे।

उन्होंने कहा, "मुख्य प्रश्न यह है कि हम ऐसे बाजार कैसे विकसित करें जो अधिक गहरे और अधिक नवोन्मेषी हों, लेकिन साथ ही अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद भी बने रहें।"

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Created On :   19 Aug 2026 1:42 PM IST

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