पश्चिम बंगाल बजट उद्योगों और निवेश को बढ़ावा देने पर भाजपा सरकार का बड़ा दांव

पश्चिम बंगाल बजट  उद्योगों और निवेश को बढ़ावा देने पर भाजपा सरकार का बड़ा दांव
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार का पहला बजट राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित नजर आ रहा है। 2026-27 के लिए विभिन्न विभागों को दी गई बजट राशि से यह संकेत मिलता है कि सरकार उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और सामाजिक विकास पर जोर देना चाहती है, ताकि बड़े निवेशकों को राज्य में आकर्षित किया जा सके।

कोलकाता, 23 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार का पहला बजट राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित नजर आ रहा है। 2026-27 के लिए विभिन्न विभागों को दी गई बजट राशि से यह संकेत मिलता है कि सरकार उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और सामाजिक विकास पर जोर देना चाहती है, ताकि बड़े निवेशकों को राज्य में आकर्षित किया जा सके।

इस बजट में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दो क्षेत्रीय विकास विभागों के लिए की गई है। पहला है उत्तर बंगाल विकास विभाग और दूसरा पश्चिमांचल उन्नयन कार्य विभाग (पीयूए)। उत्तर बंगाल विकास विभाग का बजट लगभग दोगुना बढ़ाकर 920.13 करोड़ रुपए से 1,821.52 करोड़ रुपए कर दिया गया है। वहीं, पीयूए विभाग का बजट 810.04 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1,610.85 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन दोनों विभागों के जरिए सामाजिक विकास और उद्योगों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा सकता है। इसलिए सरकार ने एक साथ दोनों लक्ष्यों को साधने की कोशिश की है।

उत्तर बंगाल में बड़ी आदिवासी आबादी रहती है। यह क्षेत्र पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां चाय, पर्यटन, लकड़ी और औषधीय पौधों के क्षेत्र में उद्योगों की काफी संभावनाएं हैं।

इसी तरह पश्चिमांचल उन्नयन कार्य विभाग के तहत बांकुड़ा, बीरभूम, झारग्राम, पश्चिम बर्दवान, पश्चिम मेदिनीपुर और पुरुलिया जैसे जिले आते हैं। इन इलाकों में भी बड़ी आदिवासी आबादी है। यहां प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ कोयला और अन्य खनिज संसाधनों के कारण औद्योगिक विकास की भी अच्छी संभावनाएं हैं। पश्चिम बर्दवान लंबे समय से राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों विभागों के बजट में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ आर्थिक कारण नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक वजहें भी हैं। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को इन क्षेत्रों में काफी अच्छा समर्थन मिला था। कई जिलों में भाजपा ने सभी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसलिए कुछ राजनीतिक जानकार इसे भाजपा समर्थक क्षेत्रों को विकास के जरिए मजबूत करने की कोशिश भी मानते हैं।

वाणिज्य और उद्योग विभाग के बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस विभाग का बजट 1,483.97 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3,266.59 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने बजट भाषण में कारोबार को आसान बनाने के लिए नई नीति की घोषणा की। इसके तहत 100 करोड़ रुपए या उससे अधिक के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार की सिंगल विंडो प्रणाली के जरिए सभी जरूरी मंजूरियां दी जाएंगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने बजट में विशेष ध्यान दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का बजट 217.16 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 506.18 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले आवंटन से दोगुने से भी अधिक है।

कुल मिलाकर, भाजपा सरकार का यह बजट औद्योगिक विकास, क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और बड़े निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Created On :   23 Jun 2026 4:43 PM IST

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