एमएलसी चुनाव निर्विरोध कराने के लिए विपक्ष के उम्मीदवारों को रिश्वत की पेशकश कांग्रेस
बुलढाणा, 4 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए सत्ता के लालच में लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया।
सपकाल ने आरोप लगाया कि आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को निर्विरोध कराने के लिए विपक्षी उम्मीदवारों को करोड़ों रुपए की पेशकश की जा रही है, ताकि वे अपना नामांकन वापस ले लें।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने इसे हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक नैतिकता को ताक पर रख दिया है।
सपकाल ने बुलढाणा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "भाजपा लोकतंत्र नहीं चाहती। वे चुनाव प्रणाली को नामांकन प्रणाली से बदलना चाहते हैं।"
सपकाल ने स्थिति को विस्तार से समझाते हुए कहा कि चल रहे विधान परिषद चुनावों में मतदाता स्थानीय स्वशासन निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिससे मतदाता वर्ग बहुत सीमित हो जाता है। इस सीमित मतदाता आधार के बावजूद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन खुलेआम धन-बल का इस्तेमाल कर रहा है।
सपकाल ने दावा किया कि सत्ताधारी गठबंधन विपक्षी उम्मीदवारों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने के लिए राज्य मशीनरी और वित्तीय शक्ति दोनों का दुरुपयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इसमें विश्वासघात, षड्यंत्र और धन का बड़े पैमाने पर वितरण शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि सत्तारूढ़ महायुति जिस आक्रामक और कुटिल तरीके से इन चुनावों की तैयारी कर रही है, वह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।
सपकाल ने कहा, "चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होना चाहिए और इन्हें स्वच्छ, निष्पक्ष और स्वस्थ वातावरण में आयोजित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की सत्ता के लिए भूख ने एक ऐसे अहंकार को जन्म दिया है जो इन एमएलसी चुनावों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
उनके अनुसार, भाजपा ने इन चुनावों को विधायकों की खरीद-फरोख्त में तब्दील कर दिया है, जो लोकतंत्र के लिए एक अंधकारमय दौर का संकेत है, जिससे उबरने के लिए संघर्ष करना होगा।
सपकाल ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाते हुए दावा किया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच सांठगांठ है।
महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की कम सीटों को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सदस्यों की मौजूदा संख्या का इस मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने बताया कि 1984 में भाजपा के लोकसभा में केवल दो सांसद थे, और उस समय किसी ने भी उनकी संख्या के आधार पर उनके अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाया था।
उन्होंने कहा कि भाजपा का सीटों की संख्या पर लगातार ध्यान केंद्रित करना केवल लोकतांत्रिक ढांचे को नष्ट करने के उसके इरादे को उजागर करता है।
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Created On :   4 Jun 2026 10:53 PM IST












