कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भाजपा की 'श्वेत पत्र' की मांग खारिज की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भाजपा की श्वेत पत्र की मांग खारिज की
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र की कर्नाटक की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र की मांग को दृढ़ता से खारिज कर दिया।

बेंगलुरु, 31 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र की कर्नाटक की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र की मांग को दृढ़ता से खारिज कर दिया।

एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति में, सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि पिछले महीने पेश किया गया राज्य बजट स्वयं सरकार के वित्त का पारदर्शी और ईमानदार विवरण प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि बजट पर विधानसभा के दोनों सदनों में बहस हुई और उसे मंजूरी मिल गई, जिसमें विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाए जिनका विधिवत जवाब दिया गया।

उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई शंका बाकी है तो वे स्पष्टीकरण देने और खुली बहस में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं।

राज्य के आर्थिक रूप से दिवालिया होने के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी विभाग को वेतन भुगतान में कोई कठिनाई नहीं हो रही है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति स्थिर बनी हुई है।

उन्होंने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे सरकार का राजनीतिक रूप से मुकाबला करने में असमर्थ होने के कारण बेबसी और ईर्ष्या के कारण ऐसे दावे कर रहे हैं।

प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर प्रकाश डालते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य का 2025-26 का बजट 4,48,004 करोड़ रुपए का है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, जबकि केंद्र सरकार की वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत है।

उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत से अधिक है, जो मजबूत आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाता है।

राजकोषीय अनुशासन पर उन्होंने कहा कि राज्य की कुल देनदारियां जीएसडीपी के 24.94 प्रतिशत पर हैं, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम के तहत निर्धारित 25 प्रतिशत की सीमा के भीतर है, जबकि केंद्र की देनदारियां जीडीपी के 55.6 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं, जो मानदंडों से अधिक है।

इसी प्रकार, कर्नाटक का राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर बना हुआ है, जबकि केंद्र का घाटा 4.3 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने करों के बंटवारे, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के मामले में कर्नाटक के प्रति केंद्र सरकार द्वारा सौतेले व्यवहार का आरोप भी लगाया।

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Created On :   31 March 2026 11:23 PM IST

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