कोलकाता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को भविष्य की सभी एफआईआर में राहत देने से किया इनकार

कोलकाता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को भविष्य की सभी एफआईआर में राहत देने से किया इनकार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भविष्य में उनके खिलाफ दर्ज होने वाली सभी एफआईआर में अग्रिम संरक्षण (ब्लैंकेट प्रोटेक्शन) देने की मांग की थी।

कोलकाता, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भविष्य में उनके खिलाफ दर्ज होने वाली सभी एफआईआर में अग्रिम संरक्षण (ब्लैंकेट प्रोटेक्शन) देने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि यदि भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज होती है, तो उसके संबंध में अलग से पूरक याचिका दायर करनी होगी और संबंधित शिकायतकर्ता को पक्षकार बनाया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य की सभी एफआईआर पर एक साथ सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती।

हालांकि, हाईकोर्ट ने पहले से दर्ज तीन एफआईआर के मामले में अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत दी है। ये एफआईआर क्रमशः 27 मई को भवानीपुर थाने, 1 जून को कालीतला थाने और 16 जून को बिष्णुपुर थाने में दर्ज की गई थीं।

अदालत ने इन तीनों मामलों में 6 अगस्त तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर पुलिस कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, पर अंतरिम रोक लगा दी। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद दर्ज दो अन्य मामलों में भी अदालत पहले ही जांच जारी रखते हुए अंतरिम संरक्षण दे चुकी है। ऐसे में समान आदेश देने में क्या कठिनाई है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल सीआईडी की दो अलग-अलग जांचों में अंतरिम राहत मिल चुकी है। इनमें एक मामला टीएमसी विधायकों के कथित 'मिसमैच' प्रकरण से जुड़ा है, जबकि दूसरा उनके खिलाफ दर्ज कथित हेट स्पीच मामले का है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री को कथित तौर पर धमकी देने का आरोप लगाया गया था।

सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वर्चुअल माध्यम से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने भविष्य की सभी संभावित एफआईआर पर अग्रिम सुरक्षा देने की मांग का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि केवल राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका के आधार पर भविष्य में दर्ज होने वाली एफआईआर को पहले से निरस्त या उन पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

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Created On :   30 July 2026 8:12 PM IST

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