रग्बी प्रीमियर लीग से ग्रामीण भारत की बेटियों को मिलेगा नया सपना संध्या राय

रग्बी प्रीमियर लीग से ग्रामीण भारत की बेटियों को मिलेगा नया सपना संध्या राय
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से चाय बागान से निकलकर भारतीय महिला रग्बी की पहचान बनने तक का सफर तय करने वाली चेन्नई बुल्स की स्टार खिलाड़ी संध्या राय का मानना है कि रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) का महिला संस्करण ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। उनका कहना है कि जब छोटे गांवों की बेटियां टीवी पर महिला खिलाड़ियों को खेलते देखेंगी तो वे भी बड़े सपने देखने का साहस जुटाएंगी।

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के एक छोटे से चाय बागान से निकलकर भारतीय महिला रग्बी की पहचान बनने तक का सफर तय करने वाली चेन्नई बुल्स की स्टार खिलाड़ी संध्या राय का मानना है कि रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) का महिला संस्करण ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। उनका कहना है कि जब छोटे गांवों की बेटियां टीवी पर महिला खिलाड़ियों को खेलते देखेंगी तो वे भी बड़े सपने देखने का साहस जुटाएंगी।

रग्बी इंडिया की पहल पर शुरू हुई रग्बी प्रीमियर लीग दुनिया की पहली फ्रेंचाइजी आधारित रग्बी सेवन्स लीग है। 2026 में पहली बार महिला प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें चार टीमें हिस्सा लेंगी।

संध्या राय ने आईएएनएस से कहा कि भारत में रग्बी खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां हैं। उन्होंने कहा कि लोग सोशल मीडिया और खबरों में खिलाड़ियों की सफलता देखकर समझते हैं कि उनके पास बहुत पैसा होगा, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने कहा, "लोग सोचते हैं कि हम बड़े स्तर पर खेलते हैं तो हमारे पास कार, बंगला और हर सुविधा होगी, लेकिन सच यह है कि अभी हमें पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। अगर किसी खिलाड़ी को चोट लग जाए तो उसे फिर से शुरुआत करनी पड़ती है और कई बार करियर भी खतरे में पड़ जाता है।"

संध्या ने कहा कि महिला रग्बी की सबसे बड़ी समस्या खिलाड़ियों को पर्याप्त समर्थन न मिलना है। उनके गांव की कई लड़कियां रग्बी खेलती थीं, लेकिन आर्थिक तंगी, चोट लगने पर पुनर्वास की कमी और मानसिक सहयोग न मिलने के कारण उन्होंने खेल छोड़ दिया।

उन्होंने बताया कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी कम उम्र में शादी के लिए मजबूर हो गईं क्योंकि उनके परिवारों को खेल में भविष्य नजर नहीं आता था। संध्या ने कहा, "मेरी कई दोस्त मुझसे बेहतर खेलती थीं, लेकिन परिवार के दबाव और अवसरों की कमी के कारण उन्होंने रग्बी छोड़ दी। अगर वे आज खेल रही होतीं तो शायद आरपीएल में मेरे साथ होतीं।"

संध्या ने अपने माता-पिता को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी आया जब वह रग्बी छोड़ना चाहती थीं क्योंकि यह एक संपर्क वाला (कॉन्टैक्ट) खेल है और उन्हें डर लगता था। लेकिन उनके माता-पिता ने लगातार प्रेरित किया और अभ्यास के लिए भेजा।

उन्होंने कहा, "जब मेरा क्लब टीम में चयन हुआ और मुझे विदेश जाने का मौका मिला, तब मुझे महसूस हुआ कि रग्बी के जरिए दुनिया देखी जा सकती है। यात्रा करने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने के बाद मेरा खेल के प्रति जुनून और बढ़ गया।"

भारत की अंडर-18 टीम की पूर्व कप्तान और सीनियर महिला टीम की पूर्व उपकप्तान संध्या राय एशिया की प्रमुख महिला रग्बी खिलाड़ियों में भी शामिल रह चुकी हैं। हालांकि उनका कहना है कि उनकी उपलब्धियों का श्रेय पूरी टीम को जाता है।

उन्होंने कहा, "मैं अकेले यहां तक नहीं पहुंची हूं। मेरे साथियों ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। 'अनस्टॉपेबल' का सम्मान सिर्फ मेरा नहीं बल्कि पूरी टीम का है।"

महिला रग्बी प्रीमियर लीग के प्रसारण को लेकर संध्या बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि जिस तरह महिला क्रिकेट ने नई पीढ़ी को प्रेरित किया, उसी तरह आरपीएल भी देशभर की लड़कियों को रग्बी अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने कहा, "आरपीएल पूरे देश में टीवी पर दिखेगा। मेरे गांव के बच्चे भी हमें खेलते देखेंगे। मैं चाहती हूं कि वे हमें देखकर प्रेरित हों और रग्बी में अपना भविष्य बनाएं। मैं चाहती हूं कि गांवों और छोटे शहरों की लड़कियां भी इस मंच तक पहुंचें और हमारे साथ खेलें।"

संध्या ने पूर्व भारतीय कप्तान और वर्तमान टीम फिजियो वाहबिज भरूचा को अपना सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और खिलाड़ियों को प्रेरित करने का तरीका उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

संध्या राय का मानना है कि प्रतिभा किसी भी गांव या छोटे शहर से निकल सकती है, जरूरत सिर्फ सही अवसर और समर्थन की है। उन्हें उम्मीद है कि रग्बी प्रीमियर लीग की शुरुआत से देश की हजारों बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का नया मंच मिलेगा।

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Created On :   15 Jun 2026 9:18 PM IST

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