गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान से कोयले की आपूर्ति शुरू, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच ऊर्जा संपर्क को बढ़ावा

गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान से कोयले की आपूर्ति शुरू, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच ऊर्जा संपर्क को बढ़ावा
भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित 'गारे पाल्मा सेक्टर-2' (जीपी2) कोयला खदान से कोयले की पहली खेप की रवानगी गुरुवार को आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित 'गारे पाल्मा सेक्टर-2' (जीपी2) कोयला खदान से कोयले की पहली खेप की रवानगी गुरुवार को आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई।

इस कदम से महाराष्ट्र के पावर प्लांट को ईंधन की सप्लाई मजबूत होने और लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा पक्की होने की उम्मीद है।

यह कोयला ब्लॉक महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के लिए डेवलप किया जा रहा है। यह एक सरकारी कंपनी है जो महाराष्ट्र में बिजली बनाने का ज्यादातर काम संभालती है।

कोयला भेजना शुरू होने के साथ ही, छत्तीसगढ़ से आने वाला कोयला अब सीधे महाराष्ट्र के थर्मल पावर स्टेशनों को मदद देगा, जिससे ईंधन की सप्लाई ज़्यादा स्थिर और भरोसेमंद हो जाएगी।

गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान में करीब 655 मिलियन टन कोयले का भंडार होने का अनुमान है और इसकी सबसे ज्यादा उत्पादन क्षमता हर साल 23.6 मिलियन टन है।

पूरी तरह से चालू होने पर, इस प्रोजेक्ट से छत्तीसगढ़ को रॉयल्टी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) के योगदान, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और दूसरे टैक्स के जरिए काफी कमाई होने की उम्मीद है।

समय के साथ, कुल सीधे राजस्व की संभावना करीब 29,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। राजस्व के अलावा, यह प्रोजेक्ट स्थानीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।

इससे 3,400 से ज्यादा सीधे रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही ट्रांसपोर्ट, कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और दूसरी सहायक सेवाओं जैसे सेक्टरों में भी अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।

इससे इस इलाके में लोगों की आजीविका को काफी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

यह प्रोजेक्ट कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) की पहलों के जरिए सामुदायिक विकास पर भी जोर देता है।

स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, साफ-सफाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास के कार्यक्रमों के लिए शुरू में 35 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।

इसके अलावा, प्रोजेक्ट के सालाना शुद्ध मुनाफे का 2 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय विकास के कामों में लगाया जाएगा।

14 प्रभावित गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास और फिर से बसाने की योजनाएं लागू की जा रही हैं।

प्रोजेक्ट के डिजाइन में पर्यावरण की सुरक्षा के उपाय भी शामिल किए गए हैं। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़ लगाना, ग्रीन बेल्ट बनाना, प्रदूषण कंट्रोल सिस्टम, पानी बचाना और खदान बंद होने के बाद जमीन को फिर से ठीक करना जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

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Created On :   9 April 2026 10:37 PM IST

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