मेघालय मुख्यमंत्री ने अल नीनो के प्रभाव से निपटने की तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए

मेघालय मुख्यमंत्री ने अल नीनो के प्रभाव से निपटने की तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मंगलवार को सभी सरकारी विभागों को संभावित अल नीनो घटना के प्रभावों से निपटने के लिए तैयारियों को तेज करने और आकस्मिक योजनाओं को कार्रवाई योग्य उपायों में बदलने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संकट उत्पन्न होने से पहले तैयारी करना जलवायु अनिश्चितताओं से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।

शिलांग, 23 जून (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मंगलवार को सभी सरकारी विभागों को संभावित अल नीनो घटना के प्रभावों से निपटने के लिए तैयारियों को तेज करने और आकस्मिक योजनाओं को कार्रवाई योग्य उपायों में बदलने का निर्देश दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संकट उत्पन्न होने से पहले तैयारी करना जलवायु अनिश्चितताओं से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।

शिलांग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में मेघालय जलवायु परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगमा ने राज्य की तैयारियों और प्रतिक्रिया रणनीति की समीक्षा की। पूर्वानुमानों से अल नीनो की स्थिति विकसित होने की आशंका जताई जा रही है। यह एक जलवायु घटना है और अक्सर मानसून के पैटर्न में व्यवधान, कम वर्षा, लंबे समय तक सूखे और जल संसाधनों और कृषि पर दबाव से जुड़ी होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय पर अल नीनो के सटीक प्रभाव के बारे में अभी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन सरकार प्रतिकूल मौसम की स्थिति उत्पन्न होने का इंतजार किए बिना कार्रवाई नहीं कर सकती। संगमा ने कहा कि हमें पहले से तैयारी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारियां और समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित हों। उन्होंने अधिकारियों को सभी क्षेत्रों में समन्वय और निगरानी तंत्र को मजबूत करने का निर्देश दिया।

बैठक में राज्य भर में वर्षा के रुझान, भूजल पुनर्भरण, मिट्टी में नमी का स्तर, संवेदनशील कृषि क्षेत्र और जल उपलब्धता के आकलन की समीक्षा की गई।

संगमा ने जल सुरक्षा को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और मृदा एवं जल संरक्षण परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन का आह्वान किया। उन्होंने विभागों को अगले छह से बारह महीनों में तालाबों और जलाशयों के गाद निष्कासन और जीर्णोद्धार, जल संचयन संरचनाओं के निर्माण, भूजल पुनर्भरण पहलों और जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण उपायों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया।

सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की तैयारी को एक जन आंदोलन में परिवर्तित किया जाना चाहिए जिसमें ग्राम संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय समुदाय शामिल हों। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बीजों और रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करें, साथ ही सिंचाई सहायता को मजबूत करें और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दें।

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Created On :   23 Jun 2026 11:32 PM IST

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