दिल्ली हाईकोर्ट ने करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे करोलबाग इलाके में लुई विटन, एचएंडएम, जारा, एलन सोली, प्यूमा और केल्विन क्लाइन जैसे मशहूर ब्रांड के नकली होने के शक वाले सामान बेचते पाए जाने वाले स्ट्रीट वेंडरों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करे।

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे करोलबाग इलाके में लुई विटन, एचएंडएम, जारा, एलन सोली, प्यूमा और केल्विन क्लाइन जैसे मशहूर ब्रांड के नकली होने के शक वाले सामान बेचते पाए जाने वाले स्ट्रीट वेंडरों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करे।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने 24 स्ट्रीट वेंडर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। इन वेंडर्स के पास प्रोविज़नल 'सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग' थे और उन्होंने करोलबाग इलाके में वेंडिंग का काम करते समय दिल्ली नगर निगम द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान एमसीडी ने रिकॉर्ड पर ऐसी तस्वीरें पेश कीं, जिनसे पता चलता है कि कई याचिकाकर्ता अजमल खान रोड के उस हिस्से में सामान बेच रहे थे, जिसे 'नो-वेंडिंग' और 'नो-हॉकिंग' जोन घोषित किया गया है।

तस्वीरों में ऐसे वेंडर भी दिखे जो लुई वितों, एचएंडएम, जारा, एलन सॉली, प्यूमा और केल्विन क्लाइन जैसे मशहूर ब्रांड के नाम वाले कपड़े और दूसरे सामान बेच रहे थे।

जस्टिस सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "अगर याचिकाकर्ताओं द्वारा बेचे गए उत्पाद नकली या 'पास-ऑफ' (किसी और के ब्रांड के नाम से बेचे जाने वाले) उत्पाद हैं, तो सीओवी की स्टैंडर्ड शर्त नंबर 10 के तहत यह एक गैरकानूनी और अवैध गतिविधि होगी। हालांकि, यह मुद्दा अभी इस कोर्ट के सामने नहीं है लेकिन कोर्ट इसे नजरअंदाज भी नहीं कर सकता।"

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोल बाग पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं और इलाके के उन अन्य वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करें, जो जाने-माने ब्रांड के नकली उत्पाद बेचते हुए पाए जाएं और उसके बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता को करोलबाग पुलिस स्टेशन और करोलबाग मेट्रो स्टेशन के बीच अजमल खान रोड के उस हिस्से पर बैठने या सामान बेचने की इजाजत नहीं दी जा सकती, जिसे पहले ही 'नो-वेंडिंग' और 'नो-स्क्वैटिंग' जोन घोषित किया जा चुका है।

न्यायमूर्ति सिंह की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, "याचिकाकर्ताओं में से किसी को भी संबंधित क्षेत्र में यानी करोलबाग पुलिस स्टेशन से करोलबाग मेट्रो स्टेशन तक अजमल खान रोड पर, जिसे पूरी तरह से नो-वेंडिंग और नॉन-स्क्वाटिंग जोन घोषित किया गया है, बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।"

एमसीडी ने बताया कि सभी 24 याचिकाकर्ताओं को सिर्फ़ मोबाइल वेंडर के तौर पर ही प्रोविज़नल सीओवी जारी किए गए थे और उन्हें कोई तय 'तेहबाजारी' (वेडिंग) जगह अलॉट नहीं की गई थी। एमसीडी ने यह भी कहा कि मोबाइल वेंडरों को अपने वेंडिंग सर्टिफ़िकेट की शर्तों का सख्ती से पालन करना होता है, जिसमें चलते-फिरते काम करना और सिर्फ तय इलाकों में ही सामान बेचना शामिल है।

तस्वीरों और स्टेट्स रिपोर्ट की जांच करने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि कई याचिकाकर्ता, मोबाइल वेंडर होने के बावजूद एक ही जगह पर रुके हुए थे और 'नो-वेंडिंग ज़ोन' (जहां वेंडिंग मना है) में वेंडिंग का काम कर रहे थे।

इसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता अपने सीओवी (वेंडिंग सर्टिफिकेट) की शर्तों और नियमों के अनुसार सख्ती से मोबाइल वेंडर के तौर पर काम करेंगे और किसी भी ऐसे इलाके में वेंडिंग नहीं करेंगे जिसे 'नो-वेंडिंग' या 'नो-हॉकिंग' ज़ोन घोषित किया गया है। साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि अगर कोई याचिकाकर्ता ऐसे प्रतिबंधित इलाकों में वेंडिंग करते हुए पाया जाता है, तो एमसीडी और संबंधित एसएचओ यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें वहां से हटाया जाए, ताकि पैदल चलने वालों को कोई रुकावट न हो और करोल बाग मेट्रो स्टेशन तक बिना किसी बाधा के पहुंचा जा सके।

बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि सही साइनबोर्ड न होने की वजह से मोबाइल वेंडर अक्सर उन इलाकों के बारे में नहीं जानते जहां वेंडिंग की मनाही है।

यह देखते हुए कि जब तक जमीन पर साइनबोर्ड नहीं लगाए जाते, तब तक ऐसे कई ज़ोन सिर्फ़ कागज पर ही "नो-वेंडिंग" जोन बने रह सकते हैं। इसने कहा कि टाउन वेंडिंग कमिटी-II के गठन के बाद, उसे नो-वेंडिंग और नो-स्क्वैटिंग (अतिक्रमण-मुक्त) इलाकों की पहचान करने वाले बोर्ड लगाने चाहिए।

हालांकि, एमसीडी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि अजमल खान रोड पर उचित साइनबोर्ड पहले ही लगा दिए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि यह 'नो-वेंडिंग' और 'नो-स्क्वैटिंग' जोन है।

अपने सीओवी की शर्तों और हाई कोर्ट द्वारा जारी अतिरिक्त निर्देशों का पालन करने की शर्त पर याचिकाकर्ताओं को प्रतिबंधित क्षेत्रों के बाहर अपनी मोबाइल वेंडिंग गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दी गई।

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Created On :   6 Aug 2026 5:19 PM IST

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