डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार बनी एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की भविष्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार बन गई है। यह बयान एक्सपर्ट्स की ओर से यहां डिजिटल पेमेंट्स पर आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया।
राष्ट्रीय राजधानी में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (सीआरएफ) ने इकिगाई लॉ और कोआन एडवाइजरी ग्रुप के साथ मिलकर एक डिजिटल पेमेंट्स कॉन्क्लेव आयोजित किया।
सीआरएफ के सदस्य संजीव अहलूवालिया ने अपने उद्घाटन भाषण में डिजिटल इकोनॉमी को भारत की भविष्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का एक अहम स्तंभ बताया। उन्होंने वित्तीय समावेशन को बढ़ाने और आर्थिक दक्षता में सुधार लाने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और डिजिटल पेमेंट की अहम भूमिका पर जोर दिया।
वहीं, इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) के विजिटिंग प्रोफेसर दीपक मिश्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन को सिर्फ बाहर से नहीं लाया जा सकता, बल्कि इसे मानव पूंजी, संस्थागत भरोसे और लगातार निवेश की मजबूत नींव पर खड़ा करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करने वाले लोग ही भविष्य में इनोवेटर बनेंगे। उन्होंने उभरती हुई टेक्नोलॉजी के साथ समझदारी से जुड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
शिव नादर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज के डीन, रजत कथुरिया ने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भरोसे पर बना है। इसमें रिसर्च, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-वैल्यू डिजिटल सेवाओं के जरिए उत्पादकता बढ़ाने की क्षमता है।
हालांकि, उन्होंने सिर्फ टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी में तरक्की ऐसी होनी चाहिए जो सबको साथ लेकर चले, साथ ही, जिसमें पहचान की सुरक्षा, सहमति और एक्सेसिबिलिटी से कोई समझौता न हो।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बालाकृष्णन महादेवन ने कहा कि जहां यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का पहला दशक इंटरऑपरेबिलिटी और बड़े पैमाने पर विस्तार वाला रहा, वहीं अगले चरण में मजबूती, बैकअप सिस्टम और एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने वाली तकनीक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पूर्व वित्त सचिव अशोक लवासा ने भारत के पेमेंट सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और सुरक्षित क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर, एक जैसे स्टैंडर्ड और स्पष्ट कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया।
इसके अलावा, जानकारों ने डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बढ़ते खतरे पर फोकस किया। उन्होंने देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत संस्थागत तालमेल, ग्राहकों में ज्यादा जागरूकता और प्रोएक्टिव साइबर सिक्योरिटी उपायों को अपनाने को जरूरत बताया।
उन्होंने कहा कि इस कॉन्क्लेव से मिलने वाली जानकारी 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप एक सुरक्षित, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाने की पॉलिसी से जुड़ी चर्चा में मदद करेगी।
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Created On :   8 July 2026 1:39 PM IST












