बांग्लादेश में फिल्म स्क्रीनिंग रोकी, मानवाधिकार संगठन ने की कड़ी आलोचना

बांग्लादेश में फिल्म स्क्रीनिंग रोकी, मानवाधिकार संगठन ने की कड़ी आलोचना
बांग्लादेश में एक फिल्म की निर्धारित स्क्रीनिंग पर प्रशासन ने ऐन मौके पर पाबंदी लगा दी। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इसकी सख्त शब्दों में निंदा की है। संगठन का आरोप है कि यह कदम कथित कट्टरपंथी दबाव के कारण उठाया गया और इससे देश में सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

पेरिस, 4 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में एक फिल्म की निर्धारित स्क्रीनिंग पर प्रशासन ने ऐन मौके पर पाबंदी लगा दी। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इसकी सख्त शब्दों में निंदा की है। संगठन का आरोप है कि यह कदम कथित कट्टरपंथी दबाव के कारण उठाया गया और इससे देश में सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

फ्रांस स्थित संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने कहा कि यह मामला केवल एक फिल्म स्क्रीनिंग को रोकने का नहीं है, बल्कि यह “सांस्कृतिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र विचार पर सीधा हमला” है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्राह्मणबाड़िया फिल्म सोसाइटी ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर 30 मई को “बोनोलता एक्सप्रेस” फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन अन्नदा सरकारी हाई स्कूल में किया था।

लेकिन स्क्रीनिंग की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर विरोध अभियान शुरू हो गया। इसमें कुछ छात्रों और कवमी मदरसा से जुड़े संगठनों पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने इस कार्यक्रम का विरोध किया और इसे धार्मिक दृष्टि से आपत्तिजनक बताया।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि इस अभियान में फिल्म पोस्टरों को काट-छांट कर दिखाना, आपत्तिजनक टिप्पणियां फैलाना और कार्यक्रम को रद्द करने की मांग करना शामिल था। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल बन गया।

दबाव बढ़ने के बाद 29 मई की शाम, यानी कार्यक्रम से एक दिन पहले, जिला प्रशासन ने स्क्रीनिंग को “अस्थायी रूप से स्थगित” करने का निर्णय लिया।

जेएमबीएफ ने कहा कि इस तरह किसी कानूनी रूप से स्वीकृत और शांतिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम को दबाव में रोकना यह दर्शाता है कि राज्य कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुक रहा है।

संगठन ने चेतावनी दी कि यह फैसला एक “खतरनाक मिसाल” कायम करता है, जिससे भविष्य में संगठित ऑनलाइन अभियानों और दबाव के जरिए सांस्कृतिक गतिविधियों को रोका जा सकता है।

जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष और मानवाधिकार वकील शहनूर इस्लाम ने कहा, " इस घटना की राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी बांग्लादेश की सरकार और संबंधित प्रशासन की है। यदि सरकार, कट्टरपंथी दबाव के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं करती, तो भविष्य में कला, साहित्य, सिनेमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर और अधिक हमले हो सकते हैं।"

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Created On :   4 Jun 2026 3:24 PM IST

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