पूर्व मंत्री कोंडा सुरेखा ने के.टी. रामा राव के खिलाफ की गई निजी टिप्पणियों पर 'खेद' जताया

हैदराबाद, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक कोंडा सुरेखा ने दो साल पहले भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव के खिलाफ की गई अपनी निजी टिप्पणियों के लिए खेद जताया है।
सुरेखा, जिन्हें पिछले महीने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ उनकी बेटी की कुछ टिप्पणियों की वजह से तेलंगाना कैबिनेट से हटा दिया गया था, ने गुरुवार को 'एक्स' पर एक स्पष्टीकरण जारी किया। यह स्पष्टीकरण 2024 में रामा राव के बारे में उनकी ओर से की गई निजी टिप्पणियों के संबंध में था।
उन्होंने कहा कि उस समय विपक्ष की आलोचना करते हुए, राजनीतिक हालात के संदर्भ में वे टिप्पणियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा ऐसी बातें कहने का नहीं था।
उन्होंने कहा, "मुझे वे बेबुनियाद टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थीं। मेरा मकसद के.टी. रामा राव (केटीआर) या उनके परिवार को दुख पहुंचाना या उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना बिल्कुल नहीं था।"
सुरेखा ने आगे कहा, "अगर मेरी टिप्पणियों से उन्हें या उनके परिवार को कोई दुख पहुंचा है, तो मैं इसके लिए खेद जताती हूं और अपनी उन टिप्पणियों को वापस लेती हूं।"
मंत्री ने 2 अक्टूबर 2024 को के.टी. रामा राव (जिन्हें केटीआर के नाम से भी जाना जाता है) के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिया था। उन्होंने अभिनेता नागा चैतन्य और सामंथा के तलाक के लिए केटीआर को जिम्मेदार ठहराया था।
नागा चैतन्य के पिता और मशहूर अभिनेता नागार्जुन ने तत्कालीन मंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने कहा कि सुरेखा की टिप्पणियों से उनके परिवार की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
नवंबर 2025 में, मंत्री द्वारा अपने बयान पर खेद जताने के बाद नागार्जुन ने मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया।
अभिनेता ने यह मुकदमा तब वापस लिया जब सुरेखा ने 'एक्स' पर स्पष्ट किया कि उनके बयान का मकसद नागार्जुन या उनके परिवार के सदस्यों को दुख पहुंचाना नहीं था।
हालांकि के.टी. रामा राव ने सुरेखा को कानूनी नोटिस भेजकर अपना बयान वापस लेने और माफी मांगने के लिए कहा था, लेकिन सुरेखा ने कहा कि वह बीआरएस नेता के बारे में की गई अपनी टिप्पणियों पर कायम हैं।
इसके बाद, के.टी. रामा राव ने तत्कालीन मंत्री के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी थी।
पिछले साल दिसंबर में, शहर की एक अदालत ने सुरेखा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए शुरुआती सबूतों की समीक्षा करने के बाद, अदालत ने पाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 और बीएनएस की धारा 222 (धारा 223 के साथ पठित) के तहत आगे बढ़ने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
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