सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर ममता बनर्जी ने जताई चिंता, बोलीं- लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए
कोलकाता, 18 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने केवल संवाद की मांग की थी, लेकिन उनकी अपील को कई सप्ताह तक नजरअंदाज किया गया।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सोनम वांगचुक की सेहत और कुशलक्षेम को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं। उन्होंने केवल बातचीत की मांग की, लेकिन उनकी अपील का जवाब लंबे समय तक खामोशी से दिया गया। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण असहमति का सम्मान होना चाहिए, उसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उनकी आवाज भी वैसे ही अनसुनी कर दी गई, जैसे देश के अनेक युवाओं की आवाजों को नजरअंदाज किया जा रहा है।"
शनिवार तड़के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वांगचुक की भूख हड़ताल का शनिवार को 21वां दिन था। वह कथित नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। पार्टी ने यह भी कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने कहा कि सोनम वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ने पर उपचार का खर्च नागरिक स्वयं वहन करने के लिए भी तैयार हैं। जनता का विश्वास पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान से हासिल होता है, न कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने या संवाद से बचने से। जो सरकार असहमति को लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के बजाय खतरे के रूप में देखती है, वह जवाबदेही से बचते हुए जनता का विश्वास नहीं मांग सकती।"
इससे पहले 14 जुलाई को भी ममता बनर्जी ने दिल्ली में चल रहे सीजेपी के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने फोन पर सोनम वांगचुक की सेहत की जानकारी ली थी और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग वाले इस आंदोलन के प्रति एकजुटता भी जताई थी।
ममता के समर्थन का स्वागत करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया के जरिए उनका आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि सीजेपी ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में आंदोलन शुरू किया था। सोनम वांगचुक शुरुआत से ही इस आंदोलन के साथ जुड़े रहे। बाद में उन्होंने घोषणा की थी कि यदि 27 जून तक केंद्र सरकार प्रश्नपत्र लीक मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो वह आमरण अनशन शुरू करेंगे। केंद्र से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
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Created On :   18 July 2026 5:14 PM IST












