राजस्थान के पूर्व मंत्री को 11 मई तक एसीबी की हिरासत में भेजा गया

राजस्थान के पूर्व मंत्री को 11 मई तक एसीबी की हिरासत में भेजा गया
एसीबी की टीम ने गुरुवार को पूर्व मंत्री महेश जोशी को अदालत में पेश किया, जहां से उनको 11 मई, 2026 तक एसीबी की हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

जयपुर, 7 मई (आईएएनएस)। एसीबी की टीम ने गुरुवार को पूर्व मंत्री महेश जोशी को अदालत में पेश किया, जहां से उनको 11 मई, 2026 तक एसीबी की हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो की विशेष जांच टीम ने 'जल जीवन मिशन' में उजागर हुए कथित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के सिलसिले में जोशी को गुरुवार सुबह उनके जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया। भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।

जांच के अनुसार, श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी (मालिक: महेश मित्तल) और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी (मालिक: पद्मचंद जैन) नामक फर्मों ने कथित तौर पर राजस्थान में सरकारी निविदाएं हासिल करने के लिए इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के जाली कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन फर्मों ने महेश जोशी, पूर्व लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, ठेकेदारों और संजय बडाया सहित निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत की।

इस कथित साजिश के कारण फर्मों ने धोखाधड़ी के माध्यम से लगभग 960 करोड़ रुपए की निविदाएं हासिल कीं।

विशेष जांच दल ने आगे आरोप लगाया कि 50 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं के लिए निविदा शर्तों में अनिवार्य 'साइट विजिट सर्टिफिकेट' जानबूझकर शामिल किए गए थे, कथित तौर पर बोलीदाताओं की पहचान उजागर करने और 'निविदा पूलिंग' को सुविधाजनक बनाने के लिए।

जांचकर्ताओं का दावा है कि इसके चलते लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा 30-40 प्रतिशत तक के असामान्य रूप से उच्च प्रीमियम स्वीकृत किए गए, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 20,000 करोड़ रुपए के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में अब तक ग्यारह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी सुबोध अग्रवाल, वरिष्ठ इंजीनियर, वित्तीय सलाहकार और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा संबद्ध एजेंसियों से जुड़े निजी व्यक्ति शामिल हैं।

अदालत ने तीन फरार आरोपियों मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं, जबकि उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया जारी है।

इस बीच, पांच अन्य आरोपियों को उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है।

मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल का संचालन अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस उप महानिरीक्षक रामेश्वर सिंह की देखरेख में किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि चल रही जांच के तहत विस्तृत पूछताछ, साक्ष्य संग्रह और तकनीकी विश्लेषण जारी हैं।

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Created On :   7 May 2026 7:12 PM IST

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