गुजरात राजकोट में ड्रोन से 130 वर्ग किमी इलाके की जांच, मच्छरों के पनपने वाली 15,377 जगहों की पहचान

गुजरात राजकोट में ड्रोन से 130 वर्ग किमी इलाके की जांच, मच्छरों के पनपने वाली 15,377 जगहों की पहचान
गुजरात के राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने ड्रोन सर्वे और एआई-आधारित निगरानी के जरिए मच्छरों के पनपने वाली 15,377 संभावित जगहों की पहचान की है। इनमें से 8,680 जगहों पर फील्ड टीमों ने कीटनाशक का छिड़काव किया है और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने के उपाय किए हैं।

राजकोट, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात के राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने ड्रोन सर्वे और एआई-आधारित निगरानी के जरिए मच्छरों के पनपने वाली 15,377 संभावित जगहों की पहचान की है। इनमें से 8,680 जगहों पर फील्ड टीमों ने कीटनाशक का छिड़काव किया है और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने के उपाय किए हैं।

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुरुवार को रिपोर्ट जारी की गई। 14 अक्टूबर तक शहर के कुल 161.85 वर्ग किमी क्षेत्रफल में से 130.59 वर्ग किमी इलाके का सर्वे किया जा चुका है।

नगर निगम ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन की मदद से 236 घंटे तक कीटनाशक का छिड़काव भी किया है। ड्रोन सर्वे में मुख्य रूप से पानी से भरे इलाकों, नालियों, नदी के किनारों पर बने गड्ढों और ऐसी अन्य जगहों पर ध्यान दिया गया, जहां मच्छर पनप सकते हैं।

इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उन जगहों पर किया जा रहा है, जहां पारंपरिक तरीके से कीटनाशक का छिड़काव करना मुश्किल है या जोखिम भरा हो सकता है। संबंधित वार्डों और स्वास्थ्य केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मी इन जगहों की जांच कर रहे हैं और जहां भी जरूरत है, वहां कीटनाशक का छिड़काव करने के साथ-साथ मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने का काम भी कर रहे हैं।

ड्रोन के जरिए किए जा रहे इस काम के साथ-साथ, फील्ड वर्करों, शहरी आशा कार्यकर्ताओं और मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्करों (एमपीडब्ल्यू) ने 8 से 14 अक्टूबर के बीच 93,686 घरों में लार्वा-रोधी अभियान चलाया।

इस दौरान 602 घरों में फॉगिंग भी की गई जबकि जिन इलाकों में मच्छरों की संख्या बहुत ज्यादा थी, वहां गाड़ियों पर लगी फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, रिहायशी सोसायटियों, सार्वजनिक सड़कों और ऐसी जगहों को भी कवर किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं।

नगर निकाय मच्छरों के पनपने की जगहों का पता लगाने के लिए घरों, दुकानों, अपार्टमेंट की इमारतों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, औद्योगिक इकाइयों और अन्य परिसरों की जांच कर रहा है।

इस दौरान, निर्माण स्थलों, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, उद्योगों, हॉस्टलों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, कबाड़ के गोदामों, बेसमेंट, हॉल, पार्टी प्लॉट, धार्मिक स्थलों, पेट्रोल पंपों और सरकारी कार्यालयों सहित 317 गैर-आवासीय परिसरों का निरीक्षण किया गया।

मच्छरों के पनपने के संबंध में आवासीय क्षेत्रों में 274 लोगों और व्यावसायिक क्षेत्रों में 59 लोगों को नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने बताया, "संबंधित नियमों के तहत मालिकों, वहां रहने वालों या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए, साथ ही उनसे प्रशासनिक शुल्क भी वसूला गया।"

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर दिन के समय काटता है और कई लोगों में संक्रमण फैला सकता है। इस मच्छर का जीवन चक्र छोटा होता है और यह बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ाता है, जिससे कम समय में ही इनकी आबादी काफी बढ़ सकती है। ऐसा खासकर तब होता है जब बर्तनों या अन्य जगहों पर साफ पानी जमा रह जाता है। नगर निगम ने पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए निगरानी भी बढ़ा दी है।

8 से 14 अक्टूबर के बीच, स्वास्थ्य कर्मियों ने 2,86,688 लोगों की आबादी का सर्वेक्षण किया, 5,355 क्लोरीन गोलियां और 973 ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) पैकेट बांटे और 3334 रेजिडुअल क्लोरीन टेस्ट किए।

नगर निकाय ने निवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करें और ड्रोन सर्वेक्षण के दौरान स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें।

साथ ही, लोगों को सलाह दी गई है कि वे पीने के पानी की स्वच्छता का ध्यान रखें, पानी को उबालकर या किसी अन्य उचित तरीके से शुद्ध करके ही पिएं और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।

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Created On :   15 Oct 2026 4:57 PM IST

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