गुजरात पुलिस ने 1,090 साइबर क्राइम मामलों से जुड़े 1,071 करोड़ रुपए से ज्यादा का पता लगाया

गुजरात पुलिस ने 1,090 साइबर क्राइम मामलों से जुड़े 1,071 करोड़ रुपए से ज्यादा का पता लगाया
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने सोमवार को असम के एक 25 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उस पर 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में शामिल एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क के लिए मुख्य फाइनेंशियल हैंडलर के तौर पर काम करने का आरोप है। पुलिस ने पूरे भारत में 1,090 साइबर क्राइम मामलों से जुड़े 10,71,55,66,034 रुपए के ट्रांजैंक्शन का पता लगाया है।

गांधीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने सोमवार को असम के एक 25 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उस पर 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में शामिल एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क के लिए मुख्य फाइनेंशियल हैंडलर के तौर पर काम करने का आरोप है। पुलिस ने पूरे भारत में 1,090 साइबर क्राइम मामलों से जुड़े 10,71,55,66,034 रुपए के ट्रांजैंक्शन का पता लगाया है।

आरोपी की पहचान असम के बारपेटा जिले के रहने वाले रफीकुल आलम के तौर पर हुई है। उसे तब गिरफ्तार किया गया जब गुजरात पुलिस की एक टीम ने टेक्निकल एनालिसिस किया और बारपेटा में उसके घर पर छापा मारने से पहले तीन दिन तक भेष बदलकर रेकी (निगरानी) की।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने उसके पास से टेक्निकल गैजेट्स भी जब्त किए हैं। जांच तब शुरू हुई जब साइबर सेंटर ने एक सीनियर सिटिजन की पहचान की, जिसे कथित तौर पर 'लाइव डिजिटल अरेस्ट' का शिकार बनाया जा रहा था।

काउंसलिंग और पूछताछ के दौरान पीड़ित ने अधिकारियों को बताया कि धोखाधड़ी करने वालों ने महाराष्ट्र पुलिस और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए नकली पत्रों का इस्तेमाल करके उसे डिजिटल रूप से अरेस्ट किया था।

पीड़ित से जुड़े बैंक अकाउंट्स की टेक्निकल जांच से जांचकर्ताओं को लगभग 10 अन्य लोगों की पहचान करने में मदद मिली, जिन्हें कथित तौर पर उसी समय भारत में अलग-अलग जगहों पर डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि टीमें उनके घरों पर गईं और उन्हें धोखेबाजों को पैसे भेजने से रोका।

बाद में जांच में ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल एनालिसिस के जरिए नेटवर्क के कथित मुख्य फाइनेंशियल हैंडलर की पहचान की गई।

पुलिस के मुताबिक, आलम कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' और दूसरे साइबर फ्रॉड से मिले पैसे को कई बैंक अकाउंट्स के जरिए घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलता था और फिर उसे एक चीनी क्रिमिनल नेटवर्क के सदस्यों को भेज देता था।

जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी ने फाइनेंशियल सर्विलांस एजेंसियों की नजर से बचने के लिए बड़ी रकम को छोटी-छोटी किश्तों में ट्रांसफर करने के तरीके (स्प्लिट ट्रांसफर) का भी इस्तेमाल किया।

पुलिस ने बताया कि एक मामले में एक घंटे के अंदर भारत में 1,754 बैंक अकाउंट्स के जरिए ट्रांजैक्शन किए गए। पुलिस ने कहा कि वे व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए चीनी अपराधियों के साथ सीधे फाइनेंशियल और ऑपरेशनल जानकारी का आदान-प्रदान करते थे।

इसमें कथित तौर पर स्कैनर, यूजर आईडी, पासवर्ड, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की जानकारी, अपराध करने का तरीका (मोडस ऑपरेंडी) और अन्य निर्देश शामिल थे।

आरोपी कथित तौर पर 'म्यूल अकाउंट नेटवर्क' चलाने में भी शामिल था। पुलिस ने बताया कि उसके मोबाइल फोन से कुल 23 क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट बरामद किए गए, जिनके जरिए 16 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन का पता चला।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने क्रिप्टोकरेंसी की गैर-कानूनी खरीद-बिक्री के लिए 'चिप सेलर' ऐप का इस्तेमाल किया और पैसों के लेन-देन के लिए गेमिंग अकाउंट्स का सहारा लिया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी पूरे भारत में साइबर अपराध के 1,090 मामलों में शामिल था, जिनमें कुल 10,71,55,66,034 रुपए का लेन-देन हुआ था।

इस जांच से साइबर सेंटर को 'डिजिटल अरेस्ट' के कई मामलों में समय रहते दखल देने में भी मदद मिली।

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Created On :   17 Aug 2026 8:55 PM IST

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