भारत और रवांडा संयुक्त आयोग की बैठक में रक्षा, कृषि, व्यापार और निवेश पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। भारत और रवांडा ने मंगलवार को संयुक्त आयोग की बैठक आयोजित की। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और रवांडा के विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री ओलिवियर जेपी नदुहुंगिरेहे ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। नदुहुंगिरेहे सोमवार को 11वें रायसीना डायलॉग और दूसरी भारत-रवांडा संयुक्त आयोग बैठक में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे।
इस बैठक में रक्षा, कृषि, व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, संस्कृति तथा लोगों के बीच संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की गई। इस बैठक में विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
कीर्ति वर्धन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, “रवांडा सरकार के विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री ओलिवियर जेपी नदुहुंगिरेहे के साथ दूसरी भारत-रवांडा संयुक्त आयोग बैठक की सह-अध्यक्षता कर खुशी हुई। हमने रक्षा, कृषि, व्यापार एवं निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। वर्ष 2026-30 के लिए एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) पर हस्ताक्षर किए गए।”
इससे पहले जनवरी में भारत में रवांडा की राजदूत जैकलीन मुकांगिरा ने कहा था कि ज्यादा गुजराती रवांडा आ रहे हैं, क्योंकि वे हमारे अनुकूल निवेश माहौल का लाभ उठा सकते हैं, जिसमें राष्ट्रीय और विदेशी निवेशकों के लिए राजकोषीय और गैर-राजकोषीय प्रोत्साहन तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता शामिल है।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के मौके पर पूर्वी अफ्रीकी देश की दूत ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “रवांडा और भारत के बीच उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं और कई भारतीय रवांडा में व्यवसाय कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या गुजरात से है। वास्तव में भारत रवांडा में दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक और उसका दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।”
उन्होंने आगे कहा कि रवांडा दवाइयां, आईसीटी मशीनरी और उपकरण, तथा चावल, वस्त्र और चीनी जैसे सामान आयात करता है, जिनमें से अधिकांश गुजरात से प्राप्त किए जा सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और रवांडा के बीच द्विपक्षीय संबंध सौहार्दपूर्ण रहे हैं और वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 1999 में रवांडा ने नई दिल्ली में अपना मिशन आधिकारिक रूप से खोला और 2001 में अपना पहला स्थायी राजदूत नियुक्त किया। भारत ने 15 अगस्त 2018 को उच्चायुक्त के आगमन के साथ किगाली में अपना स्थायी मिशन खोला।
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Created On :   3 March 2026 8:18 PM IST












