इंडिया ब्लॉक की रैली 1984 के सिख नरसंहार के घावों को फिर से हरा कर देगी अर्जुन राम मेघवाल

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को 'इंडिया' गठबंधन द्वारा 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह तारीख 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के जख्मों को फिर से ताजा कर देगी।
केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर देश में अराजकता और अशांति का माहौल बनाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
आईएएनएस से बात करते हुए मेघवाल ने कहा कि विपक्षी दलों को अपनी रैली आयोजित करने का फैसला लेने से पहले इस तारीख के ऐतिहासिक महत्व पर विचार करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर की तारीख 31 अक्टूबर 1984 के बाद हुए सिख नरसंहार के घावों को फिर से हरा करने और उन पर नमक छिड़कने जैसा है। कम से कम उन्हें इस फैसले के लिए 1 नवंबर का दिन नहीं चुनना चाहिए था। वे राष्ट्रीय हित में फैसले नहीं लेना चाहते। वे देश में अराजकता और अशांति फैलाना चाहते हैं। राहुल गांधी का बस यही मकसद है।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि 'इंडिया' गठबंधन में शामिल कुछ दल भी 1 नवंबर को रैली करने के खिलाफ थे लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार नहीं थे।
मेघवाल ने कहा कि उनके 'इंडिया' गठबंधन के कुछ दल भी 1 नवंबर को रैली करने से असहमत हैं लेकिन राहुल गांधी किसी सम्राट की तरह व्यवहार करते हैं। एक बार जब उन्होंने तय कर लिया कि विरोध प्रदर्शन 1 नवंबर को होगा, तो वह 1 नवंबर को ही होगा। उन्होंने व्यापारियों के विरोध को भी खारिज कर दिया और उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने रैली के समय पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों पर असर पड़ सकता है क्योंकि दीपावली के आसपास बाजारों में ग्राहकों की भीड़ और बिक्री बढ़ जाती है।
राहुल गांधी द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को 'मृत अर्थव्यवस्था' बताए जाने का जिक्र करते हुए मेघवाल ने कहा कि देश के आर्थिक विकास के आंकड़े कांग्रेस नेता के इस आकलन को गलत साबित करते हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था एक 'मृत अर्थव्यवस्था' है जबकि भारत के आर्थिक आंकड़े 7.8 प्रतिशत की विकास दर दिखाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यह विकास दर कैसे हासिल हुई? पहले उन्होंने विकास दर पर सवाल उठाए। अब, इस तरह का विरोध प्रदर्शन करके देखिए कि उन्होंने दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के आसपास का दिन चुना है। यह वह समय होता है जब व्यापारियों की बिक्री बढ़ती है और बाजारों में बड़ी संख्या में खरीदार आते हैं।
उन्होंने कहा कि शायद उन्होंने अर्थव्यवस्था को बाधित करने और बढ़ती अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए दीपावली के आसपास 1 नवंबर का दिन चुना। व्यापारी विरोध कर रहे हैं लेकिन उनकी भी अनदेखी की जा रही है।
भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान पर मेघवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल स्थापित प्रक्रियाओं और कानूनों के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारा कहना है कि यह देश 'भीड़तंत्र' से नहीं चलाया जा सकता। लोकतंत्र का सम्मान करें। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें और अनुमति लेकर ऐसा करें, यह समझ में आता है। इसीलिए हम कह रहे हैं 'लोकतंत्र बचाओ और अराजकता फैलाने वालों को हटाओ'।
राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) पर बार-बार सवाल उठाए जाने पर मेघवाल ने सवाल खड़े किए।
उन्होंने पूछा कि मैं आपके माध्यम से उनसे यह भी पूछना चाहता हूं, केरल में कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि हम एसआईआर की वजह से चुनाव जीते लेकिन वे अपने ही नेताओं की बात नहीं सुन रहे हैं। कभी वे ईवीएम की बात करते हैं, तो कभी एसआईआर की। हिमाचल प्रदेश में आप किस वोटिंग मशीन की मदद से सत्ता में आए? कर्नाटक में किस वोटिंग मशीन ने आपको सत्ता दिलाई? केरल में आप कैसे सत्ता में हैं? तेलंगाना में आप कैसे सत्ता में हैं और आपने अब तक कितनी बार एसआईआर करवाया है?"
मेघवाल ने कहा कि जब आप ऐसा करते हैं तो ठीक है, लेकिन जब हम करते हैं तो गलत हो जाता है। उनके आचरण में यह कैसा विरोधाभास है? उनके बर्ताव में कई विरोधाभास हैं। आजकल वे राष्ट्रीय हित में फैसले लेने के बजाय, देश में अराजकता और अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं, खासकर चुनाव आयोग के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठे और बेबुनियाद तथ्यों के आधार पर हमारी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं।
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने विपक्ष से उन लोगों की सूची मांगी थी जो मिलना चाहते थे ताकि मुलाकात का समय तय किया जा सके। हालांकि, विपक्ष बिना जरूरी सूची सौंपे ही 300 सांसदों के साथ चुनाव आयोग से मिलना चाहता था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद सांसद आकाशवाणी परिसर के आसपास इकट्ठा हुए और बाद में राष्ट्रपति से मिले। अगर 10 लोग राष्ट्रपति से मिलने जा सकते थे, तो वे 10 लोग चुनाव आयोग से भी मिल सकते थे लेकिन उन्हें तो हंगामा करना था।
मेघवाल ने आगे दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देने को कहा था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने बिना कोई सबूत पेश किए ही उनकी बातों को मान लिया। वे कितना झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने आज तक कोई सबूत नहीं दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन के द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्द कहे जाने पर मेघवाल ने कहा कि विपक्ष के इस वरिष्ठ नेता को अपने सार्वजनिक बयानों में संयम बरतना चाहिए और अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए।
मेघवाल ने कहा कि खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। उनकी भाषा संयमित होनी चाहिए। वह एक वरिष्ठ नेता हैं लेकिन यह कोई ऐसा मामला नहीं है जहां बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई हो। नेता प्रधानमंत्री की आलोचना कर सकते हैं और उनकी नीतियों से असहमत हो सकते हैं लेकिन उनके खिलाफ अपशब्द नहीं कह सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैंने सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति को इतनी भद्दी भाषा का इस्तेमाल करते कभी नहीं देखा। इससे पता चलता है कि उनके दिल में प्रधानमंत्री के लिए कितनी नफरत है। आप उनका विरोध कर सकते हैं, आप उन पर तंज कस सकते हैं लेकिन क्या आप उन्हें अपशब्द कहेंगे। खड़गे को देश से माफी मांगनी होगी, जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।
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