'गगनयान' मिशन में बड़ी प्रगति, देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारी में अहम परीक्षण पूरे डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (एचएलवीएम3) के सभी प्रोपल्शन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है।
मंत्री ने कहा कि गगनयान मिशन के तहत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण प्रणालियों के विकास और सत्यापन में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करेगा, जिन्होंने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्वयं के प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में भेजा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मिशन की आगामी रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 2026 की चौथी तिमाही में गगनयान का पहला मानव रहित प्रायोगिक मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन में 'व्योममित्र' नामक अर्ध-मानव रोबोट को भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह मिशन उन नई तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन करेगा, जिन्हें पहली बार गगनयान कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है। इसके बाद 2027 तक दो और मानव रहित मिशन संचालित किए जाएंगे, जिनका विन्यास पहले मानवयुक्त मिशन जैसा होगा। इन परीक्षण मिशनों के सफल होने के बाद भारत का पहला मानवयुक्त कक्षीय अंतरिक्ष मिशन शुरू किया जाएगा।
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) को परिचालन में लाने की योजना पर काम कर रहा है। इसरो ने 5 मॉड्यूल वाले इस अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार कर ली है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल बीएएस-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है, और इसके लिए आवश्यक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विकास का कार्य इसरो के विभिन्न केंद्रों और इकाइयों में तेजी से चल रहा है।
मंत्री ने जानकारी दी कि एचएलवीएम3 के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्शन सिस्टम का विकास, परीक्षण और प्रमाणन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
इसके अलावा, पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस) का इंजीनियरिंग मॉडल, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, डिसेलेरेशन सिस्टम, क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम और संपूर्ण एवियोनिक्स प्रणाली का भी सफल विकास और परीक्षण किया जा चुका है।
अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को लेकर डॉ. सिंह ने कहा कि क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) के लिए आवश्यक सभी 5 प्रकार के मोटरों का विकास पूरा हो गया है और उनके सफल स्टैटिक परीक्षण किए जा चुके हैं। साथ ही इससे जुड़ी सभी संरचनाओं को भी विकसित और प्रमाणित कर लिया गया है।
अंतरिक्ष विभाग के एक बयान में कहा गया है कि मिशन के लिए आवश्यक प्रमुख बुनियादी ढांचे भी तैयार कर लिए गए हैं, जिनमें ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी, गगनयान कंट्रोल सेंटर, क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी और दूसरे लॉन्च पैड में किए गए संशोधन शामिल हैं, जो आगामी मिशनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
गौरतलब है कि 'गगनयान' भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके सफल होने पर भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजना भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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Created On :   6 Aug 2026 8:42 PM IST












