भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-मई में पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत रहा केंद्र
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-मई में 1.624 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत है। यह जानकारी कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (सीजीए) की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों में दी गई।
सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 27 के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे पता चलता है कि शुरुआती दो महीनों के आंकड़े देश की मजबूत वित्तीय स्थिति को दिखाते हैं और देश 2026-27 के बजट में तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है।
वित्त वर्ष 26 की इसी अवधि में राजकोषीय घाटा 13,163 करोड़ रुपए था, जो पूरे साल के लक्ष्य का 0.8 प्रतिशत है।
भारत ने मई में 2 लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय अधिशेष दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष मई में यह अधिशेष 1.73 लाख करोड़ रुपए था। अप्रैल में सरकार की कुल प्राप्तियां 2.13 लाख करोड़ रुपए रहीं और इस दौरान 5.75 लाख करोड़ रुपए का व्यय दर्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष के पहले महीने में लगभग 3.62 लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा हुआ।
गैर-कर राजस्व मई में 3.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 2.90 लाख करोड़ रुपए था। मई के ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपए के अधिशेष हस्तांतरण को मंजूरी देने के बाद आए हैं।
मई में पूंजीगत खर्च 61,200 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 61,600 करोड़ रुपए था। हालांकि, अप्रैल-मई के दौरान पूंजीगत खर्च बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 2.21 लाख करोड़ रुपए था।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-मई में कुल कर राजस्व 5.25 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.15 लाख करोड़ रुपए था।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा टारगेट हासिल कर लिया है और फिस्कल कंसोलिडेशन प्रोसेस के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इस टारगेट को घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत कर दिया है।
राजकोषीय घाटा में कमी से अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार मजबूत होते हैं और कीमतों में स्थिरता के साथ विकास का रास्ता साफ होता है। इससे सरकार की उधारी में कमी आती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में कॉरपोरेट्स और कंज्यूमर्स को कर्ज देने के लिए अधिक फंड उपलब्ध होता है और आर्थिक विकास में तेजी आती है।
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Created On :   30 Jun 2026 5:31 PM IST












