जिंदगी तय शेड्यूल की तरह नहीं चलती, इसलिए खुद को दोष न दें ईशा कोप्पिकर
मुंबई, 17 जून (आईएएनएस)। साल के बीच का समय अक्सर लोगों के लिए आत्मचिंतन का समय लेकर आता है। जनवरी में बनाए गए नए साल के रेजोल्यूशन जब जून-जुलाई तक पूरे नहीं हो पाते, तो कई लोग खुद को असफल मानने लगते हैं। ऐसे में अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर लोगों को समझाया कि जीवन किसी तय शेड्यूल या चेकलिस्ट की तरह नहीं चलता, ऐसे में किसी भी तरह का अफसोस मनाना सही नहीं है।
वीडियो में ईशा कोप्पिकर कहती हैं, ''नए साल की शुरुआत में लोग बड़े सपने और बड़े लक्ष्य बनाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, कई चीजें बदल जाती हैं। कभी जिम जाना छूट जाता है, कभी काम की व्यस्तता बढ़ जाती है, तो कभी निजी जीवन में ऐसे बदलाव आ जाते हैं जिनका असर हमारे पूरे साल के प्लान पर पड़ता है। ऐसे में खुद को दोषी मानना सही नहीं है।''
ईशा ने कहा, ''कई लोग सोचते हैं कि उन्होंने आधा साल बर्बाद कर दिया है, क्योंकि वे अपने तय किए गए लक्ष्य पूरे नहीं कर पाए, लेकिन असली तरक्की हमेशा दिखाई नहीं देती। यह जरूरी नहीं कि सफलता केवल बड़े नतीजों से मापी जाए, बल्कि कई बार हम इस दौरान मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं, समझदार होते हैं और खुद को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं। यह भी एक तरह की ग्रोथ है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।''
ईशा ने अपने वीडियो में कहा, ''कई बार लोग केवल इसलिए आगे बढ़ रहे होते हैं क्योंकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों को झेला होता है। अगर इस दौरान किसी ने खुद को संभाल लिया है, अपने जीवन में छोटे-छोटे सही फैसले लिए हैं या पहली बार खुद को प्राथमिकता दी है, तो यह भी एक बड़ी उपलब्धि है। लोगों को अपने अंदर इस बदलाव को पहचानना चाहिए और उसे कम नहीं आंकना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''हमें अपने ऊपर बेवजह दबाव नहीं डालना चाहिए। जीवन में कोई तय शेड्यूल नहीं होता, और न ही जीवन कभी सीधा चलता है। हमें कभी रुकना पड़ता है, कभी रास्ता बदलना पड़ता है और कभी गिरकर फिर से उठना पड़ता है। यही जीवन का असली अनुभव है और यही हमें मजबूत बनाता है।''
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पछतावे को छोड़ दें। उन्होंने कहा, ''अगर इस साल की शुरुआत में आपने कोई सपना देखा था, तो वह सपना अभी भी आपका है और खत्म नहीं हुआ है। केवल कुछ समय के लिए आपकी रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप पीछे रह गए हैं। आधा साल अभी भी बाकी है और यह समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना साल की शुरुआत होती है।''
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Created On :   17 Jun 2026 3:21 PM IST












