मराठा आंदोलन तेज, मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई कूच का किया ऐलान

मराठा आंदोलन तेज, मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई कूच का किया ऐलान
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने संकेत दिया है कि यदि महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है तो वे अपने समर्थकों के साथ मुंबई का रुख करेंगे। मराठा आरक्षण में कथित खामियों को दूर करने और प्रमाणपत्रों के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में लाने वाले जरांगे पाटिल ने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है।

छत्रपति संभाजीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने संकेत दिया है कि यदि महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है तो वे अपने समर्थकों के साथ मुंबई का रुख करेंगे। मराठा आरक्षण में कथित खामियों को दूर करने और प्रमाणपत्रों के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में लाने वाले जरांगे पाटिल ने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है।

उन्होंने 12 सितंबर को दोपहर 12 बजे समर्थकों की बैठक बुलाई है, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। जरांगे पाटिल ने बताया कि मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन किया गया है और उन्हें भरोसा है कि सरकार इसकी मंजूरी देगी।

सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "नाक दबाए बिना मुंह नहीं खुलता।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अब आंदोलनकारी मुंबई जाने के लिए तैयार हैं।

जरांगे पाटिल ने कहा, "यदि हमने कानून के अनुसार अनुमति मांगी है तो उसे देना सरकार की जिम्मेदारी है। गृह विभाग को इसकी मंजूरी देनी चाहिए और सरकार को नियमों का पालन करना चाहिए। लेकिन सरकार खुद को सबके ऊपर, यहां तक कि अदालतों से भी ऊपर समझती है और संविधान का उल्लंघन कर रही है। अनुमति मिलेगी और आजाद मैदान में अनशन होगा।"

उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे अंतरवाली सराटी में वाहन लेकर न आएं। दूर-दराज से आने वालों को रात में और स्थानीय लोगों को सुबह पहुंचने की सलाह दी गई है।

इस बीच, सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि जरांगे पाटिल द्वारा उठाई गई 15 मांगों में से 12 मांगें पूरी की जा चुकी हैं। सरकार ने दोहराया कि बातचीत के लिए उसके दरवाजे हमेशा खुले हैं।

आंदोलन तेज करने के निर्णय के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने जरांगे पाटिल से मुलाकात की और बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि जरांगे पाटिल के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती न की जाए।

दिपके ने कहा कि महाराष्ट्र को सामाजिक परिवर्तन के लिए जरांगे पाटिल की जरूरत है। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "अगर सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए होते तो मनोज जरांगे जैसे लोगों को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की नौबत नहीं आती। यह प्रशासन की विफलता है।"

उन्होंने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के पास हास्य कलाकारों और सोशल मीडिया हस्तियों से मिलने का समय है, लेकिन समुदाय के हित में 14 दिनों से अनशन कर रहे एक नेता से बात करने का समय नहीं है।

दिपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का उदाहरण देते हुए सरकार को चेतावनी दी कि जरांगे पाटिल को जबरन हटाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा, "यह महाराष्ट्र है। यदि सरकार ने मनोज जरांगे पाटिल को बलपूर्वक हटाने की कोशिश की, तो राज्य के कोने-कोने से लोग अंतरवाली सराटी पहुंच जाएंगे और सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे।"

उधर, मराठवाड़ा के विभिन्न जिलों में जरांगे पाटिल के आंदोलन को समर्थन लगातार बढ़ रहा है। मुंबई के आजाद मैदान तक प्रस्तावित मार्च की तैयारियों के बीच कई स्थानों पर प्रदर्शन किए गए।

सकल मराठा समाज के बैनर तले लातूर तालुका के चिंचोलीराव वाड़ी क्षेत्र में लातूर-बार्शी मार्ग पर दो घंटे का चक्का जाम किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

वहीं, निलंगा तालुका के नितूर में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर लातूर-जहीराबाद राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया।

इसी दौरान सरकार ने विभिन्न जिलों में जारी किए गए प्रमाणपत्रों की संख्या से संबंधित विवरण सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है।

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Created On :   12 Sept 2026 12:00 AM IST

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