कर्नाटक 5 लाख रुपये रिश्वत मामले में भाजपा विधायक चंद्रू लामानी को सशर्त जमानत
बेंगलुरु, 11 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के गडग जिले की शिरहट्टी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक चंद्रू लामानी को 5 लाख रुपये की कथित रिश्वत मामले में बुधवार को बेंगलुरु स्थित जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष अदालत से सशर्त जमानत मिल गई।
अदालत ने उन्हें 2 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने और दो जमानतदार देने की शर्त पर राहत दी। यह फैसला विधायक लामानी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो पिछले 15 दिनों से बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे।
कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने 21 फरवरी को गडग जिले के लक्ष्मेश्वर कस्बे में एक ठेकेदार से कथित तौर पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए लामानी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
लोकायुक्त के अनुसार, गडग इकाई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए) और 7(ए) के तहत यह ट्रैप कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने बताया कि विधायक कथित तौर पर बड़ी रिश्वत मांग के हिस्से के रूप में यह रकम स्वीकार कर रहे थे।
लोकायुक्त अधिकारियों के मुताबिक, लामानी ने प्रथम श्रेणी के ठेकेदार विजय पूजार से लघु सिंचाई विभाग के एक ठेके के आवंटन के बदले 11 लाख रुपये की मांग की थी। यह कथित रिश्वत सड़क के दोनों किनारों पर रिटेनिंग वॉल के निर्माण से जुड़े काम के लिए मांगी गई थी।
ट्रैप ऑपरेशन के दौरान विधायक के सरकारी निजी सहायक मंजूनाथ वाल्मीकि और निजी सहायक गुरु लामानी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
यह कार्रवाई धारवाड़ लोकायुक्त के पुलिस अधीक्षक सिद्धालिंगप्पा के नेतृत्व में की गई थी। गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने लक्ष्मेश्वर में स्थित बालाजी अस्पताल में भी तलाशी ली, जो विधायक के स्वामित्व में बताया जाता है।
इस घटनाक्रम को पहले भाजपा के लिए झटका माना गया था, क्योंकि पार्टी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर ठेकेदारों से कमीशन मांगने और भुगतान में देरी के आरोप लगाती रही है।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला प्रभारी मंत्री और विधि व संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल तथा कांग्रेस नेता कृष्णगौड़ा पाटिल विधायक लामानी को फंसाने की साजिश के पीछे हैं।
भाजपा नेताओं बसवराज चक्रसाली और फकीरेश रत्तिहाली ने कहा कि शिकायतकर्ता विजय पूजार कांग्रेस से जुड़ा पदाधिकारी है और वह विधायक को फंसाने की साजिश का हिस्सा है।
वहीं भाजपा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की सभी पहलुओं से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी को रिश्वत लेने के लिए मजबूर करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
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Created On :   11 March 2026 10:15 PM IST












