शिकायतों के बाद केरल पीएससी ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड परीक्षा की रैंक लिस्ट रद्द की, विजिलेंस जांच के दिए आदेश

शिकायतों के बाद केरल पीएससी ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड परीक्षा की रैंक लिस्ट रद्द की, विजिलेंस जांच के दिए आदेश
केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड की भर्ती परीक्षा में मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ियों का पता चलने के बाद सोमवार को मौजूदा रैंक लिस्ट रद्द कर दी। साथ ही, नए सिरे से मूल्यांकन के बाद एक संशोधित लिस्ट जारी करने और आंतरिक विजिलेंस जांच के आदेश देने का फैसला किया।

तिरुवनंतपुरम, 29 जून (आईएएनएस)। केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड की भर्ती परीक्षा में मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ियों का पता चलने के बाद सोमवार को मौजूदा रैंक लिस्ट रद्द कर दी। साथ ही, नए सिरे से मूल्यांकन के बाद एक संशोधित लिस्ट जारी करने और आंतरिक विजिलेंस जांच के आदेश देने का फैसला किया।

पीएससी ने उन 10 उत्तरों का फिर से मूल्यांकन करने का भी फैसला किया, जिन्हें मूल मूल्यांकन के दौरान बिना जांच छोड़ दिया गया था। यह एक ऐसी लापरवाही थी, जिससे उम्मीदवारों की रैंकिंग बदल सकती थी।

पुनर्मूल्यांकन के बाद एक नई रैंक लिस्ट तैयार की जाएगी।

कमीशन के आंतरिक विजिलेंस विंग को यह जांचने का काम सौंपा गया है कि यह लापरवाही कैसे हुई, क्या मूल्यांकन की तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया, और क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पता चला कि स्टेट प्लानिंग बोर्ड में चीफ (उद्योग और बुनियादी ढांचा विभाग) के पद के लिए हुई परीक्षा में 10 वर्णनात्मक सवालों के जवाबों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था।

इस खुलासे से गंभीर चिंताएं पैदा हुईं कि उम्मीदवारों के स्कोर और रैंकिंग में काफी गड़बड़ी हो सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग उठी।

यह सब पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ, और पीएससी के सभी 15 सदस्य तत्कालीन सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन द्वारा नामित थे।

इस घटना ने एक बार फिर केरल पीएससी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और इसे हाल के वर्षों में इस संवैधानिक भर्ती संस्था द्वारा देखी गई सबसे गंभीर परीक्षा अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है।

यह परीक्षा प्लानिंग बोर्ड के तीन वरिष्ठ पदों के लिए एक संयुक्त भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिनमें राज्य सरकार के सबसे ऊंचे वेतनमानों में से एक मिलता है।

इस परीक्षा में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए थे। यह परीक्षा चीफ (उद्योग और बुनियादी ढांचा विभाग), चीफ (परिप्रेक्ष्य योजना विभाग) और चीफ (योजना समन्वय विभाग) के पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिनमें से प्रत्येक का मूल वेतन लगभग 1.25 लाख रुपए प्रति माह है।

यह अनियमितता महीनों तक छिपी रही क्योंकि शुरू में उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देने से इनकार कर दिया गया था।

यह मामला सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत लंबी कार्यवाही के बाद ही सामने आया, जब उम्मीदवारों को आखिरकार अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मिलीं और उन्हें पता चला कि 10 सवालों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था। अगर उन सवालों के लिए अंक दिए गए होते तो मौजूदा रैंक लिस्ट में काफी बदलाव हो सकते थे।

रैंक लिस्ट को रद्द करने और आंतरिक विजिलेंस जांच का आदेश देने का आयोग का फैसला, इस चूक की गंभीरता को परोक्ष रूप से स्वीकार करने जैसा है।

उम्मीद है कि जांच के नतीजे से पीएससी के भीतर जवाबदेही तय होगी और साथ ही राज्य की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता में भरोसा फिर से कायम हो सकेगा।

राज्य सरकार 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रही है, क्योंकि पीएससी में आम तौर पर यही नियम है कि अगर कोई शिकायत मिलती है तो उसका आंतरिक विजिलेंस विंग जांच करता है और उसी के आधार पर अगला कदम उठाया जाता है।

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Created On :   29 Jun 2026 11:14 PM IST

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