केआईआईएफबी भूमि जांच से सीपीएम का कन्नूर गढ़ सवालों के घेरे में

तिरुवनंतपुरम, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के कन्नूर में केआईआईएफबी (केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड) की ओर से भूमि अधिग्रहण की विजिलेंस जांच राज्य की सतीसन सरकार के लिए सबसे संवेदनशील राजनीतिक परीक्षाओं में से एक बन सकती है। इससे सीपीएम के सबसे मजबूत संगठनात्मक गढ़ में पिछली एलडीएफ सरकार के फैसलों पर सवाल उठ सकते हैं। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, राज्य सचिव एमवी गोविंदन और जयराजन गुट के वरिष्ठ नेताओं का गृह क्षेत्र है।
यह सिर्फ एक सामान्य वित्तीय जांच नहीं है, बल्कि इससे यह पता चलेगा कि सरकार उस जिले में बड़े भूमि अधिग्रहणों के पीछे लिए गए फैसलों की जांच करने के लिए किस हद तक जाने को तैयार है, जहां सीपीएम का राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव बहुत मजबूत है। माना जा रहा है कि इस जांच के नतीजे पार्टी के कन्नूर नेतृत्व पर पिछले एक दशक में लिए गए फैसलों का बचाव करने का दबाव भी बढ़ सकता है।
सतीसन कैबिनेट ने बुधवार को यह फैसला पूर्व आईएएस अधिकारी सुधा पिल्लई की अध्यक्षता वाली एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद लिया। कमेटी ने 2016 से 2026 तक केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के कामकाज की जांच की थी।
इस अवधि में पिनाराई विजयन सरकार के दोनों कार्यकाल शामिल हैं। पहले कार्यकाल में थॉमस इसाक वित्त मंत्री थे, जबकि दूसरे कार्यकाल में यह जिम्मेदारी केएन बालगोपाल के पास थी। इसलिए जांच अधिकारियों को जो सबूत और निष्कर्ष मिलेंगे, उसके आधार पर दोनों मंत्रियों के कार्यकाल में लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक फैसले जांच के दायरे में आ सकते हैं।
शुरुआती जांच मुख्य रूप से कन्नूर में हुए भूमि अधिग्रहण पर केंद्रित होने की उम्मीद है। इसमें यह देखा जाएगा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया क्या थी, क्या सही कीमत चुकाई गई, क्या जरूरी मंजूरियां ली गईं और क्या सार्वजनिक धन का इस्तेमाल तय नियमों के अनुसार किया गया। वित्त और राजस्व विभाग की ओर से विजिलेंस टीम को तकनीकी सहायता दिए जाने की भी उम्मीद है।
इस स्थिति में मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता इसके स्थान और लेन-देन के बड़े पैमाने, दोनों कारणों से है।
कन्नूर क्षेत्र, पूर्व सीएम पिनाराई विजयन, राज्य सचिव एमवी गोविंदन और वरिष्ठ नेताओं ईपी जयराजन, एमवी जयराजन और पी. जयराजन का गृह क्षेत्र है। और यहां की पार्टी इकाई का लंबे समय से सीपीएम के भीतर काफी प्रभाव रहा है। वहीं, मामले में ईपी जयराजन के परिवार में भी विवाद बढ़ा। एक करीबी रिश्तेदार ने उन पर कुछ आरोप लगाए।
जांच का दायरा नियुक्तियों और विशेषज्ञ समिति की ओर से पहचानी गई अन्य कथित अनियमितताओं तक भी बढ़ सकता है। यह जांच वरिष्ठ अधिकारियों या राजनीतिक नेताओं तक पहुंचेगी या नहीं, यह सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगा।
सीपीएम के लिए चुनौती यह होगी कि वह केरल के बुनियादी ढांचे के विकास में केआईआईएफबी की भूमिका का बचाव करे और साथ ही जमीन के सौदों से जुड़े विशिष्ट सवालों के जवाब भी दे। यूडीएफ सरकार के लिए परीक्षा यह सुनिश्चित करने की होगी कि यह जांच केवल राजनीतिक टकराव बनकर न रह जाए, बल्कि इसके जरिए स्पष्ट रूप से हुए उल्लंघनों को साबित किया जा सके।
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