कोलकाता में अवैध निर्माणों को गिराने का काम शुरू, नगर निगम अधिकारियों और मंत्री की भूमिका की होगी जांच
कोलकाता, 24 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में अवैध निर्माण के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा किए जाने के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने विभिन्न स्थानों पर नियमों के उल्लंघन के लिए नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।
रविवार को नगर निगम के कर्मचारियों ने कोलकाता के छह इलाकों में अवैध निर्माणों को गिराने के लिए छापा मारा।
इन छह जगहों में से नगर निकाय ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच तिलजला, कस्बा और बेलियाघाटा में तीन अवैध निर्माणों को गिराना शुरू कर दिया।
केएमसी अधिकारियों के अनुसार, गिराए जा रहे तीनों अवैध निर्माणों में से हर एक का संबंध किसी स्थानीय तृणमूल नेता से है। बेलियाघाटा में हुए अवैध निर्माण से तृणमूल नेता राजू नास्कर जुड़े थे। बाकी दो जगहों पर हुए दो अवैध निर्माणों में एक स्थानीय पार्षद और एक बोरो चेयरमैन के शामिल होने की भी खबरें हैं। हालांकि तीनों ने ही अवैध निर्माणों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।
आरोप है कि निर्माण के लिए केएमसी द्वारा स्वीकृत योजना को नजरअंदाज करते हुए बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई थीं और दो ब्लॉक में तो निर्माण कार्य अभी भी जारी था।
आईएएनएस से बात करते हुए केएमसी कमिश्नर स्मिता पांडे ने कहा कि आज छह जगहों पर अवैध निर्माणों को गिराने का अभियान चलाया जा रहा है। कई मामलों में हम पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं, जबकि कुछ मामले अदालत में लंबित हैं। जहां भी कोई कानूनी बाधा नहीं है, हम वहां निर्माण गिराने की कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।
केएमसी ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। पुलिस और केंद्रीय बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है।
कुछ दिन पहले केएमसी ने तिलजला, कस्बा और बेलियाघाटा के इलाकों में अवैध निर्माणों की पहचान करते हुए नोटिस भेजे थे। यह नोटिस कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 400(1) के तहत भेजा गया था। इस धारा के अनुसार, नगर आयुक्त किसी भी घर के अवैध हिस्से या किसी भी बिना योजना के किए गए निर्माण को गिराने या उस पर काम रोकने का आदेश दे सकते हैं। हालांकि निर्माण गिराने से पहले नगर निगम को संबंधित संपत्ति के मालिक को नोटिस भेजना होता है।
अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम ने मालिक को नियमों के उल्लंघन के बारे में सूचित कर दिया था। नोटिस में यह जिक्र था कि यदि मालिक अवैध निर्माण को खुद नहीं गिराता है, तो केएमसी उसे गिरा देगी और इसी के अनुरूप केएमसी ने कार्रवाई की।
निर्माण स्थल के बाहर लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि दिसंबर में नगर निगम के अधिकारी जगह का मुआयना करने आए थे और इसे अवैध पाया गया था। इसके बाद भी यह सवाल उठ रहे हैं कि निर्माण कार्य क्यों रोका नहीं गया।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि हमने अवैध निर्माणों की पहचान करने का काम शुरू कर दिया है। जिन लोगों ने ये अवैध इमारतें बनाई हैं, उनके खिलाफ तो दंडात्मक कार्रवाई की ही जाएगी।
साथ ही नगर निगम के जो अधिकारी और कर्मचारी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। ये सभी अवैध इमारतें कैसे बन गईं। क्या नगर निगम या पिछले मंत्री ने इन्हें नहीं देखा। हर किसी की भूमिका की जांच की जाएगी।
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Created On :   24 May 2026 6:26 PM IST












