लद्दाख के 'सिविल सोसायटी फोरम' ने सोनम वांगचुक पर बातचीत के एजेंडे को हथियाने का आरोप लगाया

लद्दाख के सिविल सोसायटी फोरम ने सोनम वांगचुक पर बातचीत के एजेंडे को हथियाने का आरोप लगाया
लद्दाख के 'सिविल सोसायटी फोरम' ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने केंद्र के साथ चल रही बातचीत में जमीन, नौकरी और सांस्कृतिक सुरक्षा के मूल एजेंडे को हाईजैक कर लिया है। साथ ही, उन्होंने दावा किया है कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस अब सभी जिलों की आवाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

लेह, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। लद्दाख के 'सिविल सोसायटी फोरम' ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने केंद्र के साथ चल रही बातचीत में जमीन, नौकरी और सांस्कृतिक सुरक्षा के मूल एजेंडे को हाईजैक कर लिया है। साथ ही, उन्होंने दावा किया है कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस अब सभी जिलों की आवाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

फोरम की बैठक लेह में हुई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, एलएबी और केडीए के बीच बातचीत में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई गई। फोरम ने आरोप लगाया कि लद्दाख की जमीन, नौकरियों और संस्कृति की सुरक्षा के मूल एजेंडे से भटकाव हुआ है। साथ ही, बातचीत के दौरान कुछ सदस्यों के टकराव वाले रवैये की भी आलोचना की गई।

हाल ही में हुई इस बैठक में पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग, पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद रिग्जेन स्पालबर और पूर्व एमएलसी त्सेरिंग साम्पेल शामिल हुए।

इसके अलावा, थिक्से और थुक्से रिम्पोछे के प्रतिनिधि, विभिन्न मठों के भिक्षु, लद्दाख बौद्ध संघ के सदस्य, नंबरदार, सेवानिवृत्त अधिकारी और नागरिक समाज के अन्य लोग भी इसमें शामिल हुए।

छेवांग ने आरोप लगाया कि एलएबी और केडीए के नेताओं ने विकल्पों की ठीक से जांच किए बिना ही एमएचए के मसौदा प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने पिछली बैठकों के नतीजों को भी गलत तरीके से पेश किया, जिससे जनता के बीच भ्रम पैदा हुआ।

उन्होंने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली एमएचए की बैठक न हो पाने के लिए बार-बार हो रही देरी, गलत जानकारी फैलाने और पहले बनी सहमति की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चिंता जताई कि इसका लेह, और खासकर वहां के बौद्ध समुदाय पर बुरा असर पड़ सकता है।

फोरम ने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को देरी की चालों और टकराव की राजनीति का बंधक नहीं बनने देना चाहिए।

फोरम ने सभी जिलों में जल्द से जल्द पंचायत और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव कराने की मांग की, साथ ही चुनी गई परिषदों को अधिक शक्तियां देने की बात कही। उन्होंने सभी जिलों से लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों के साथ एलएबी के पुनर्गठन की भी मांग की।

बातचीत जारी रखने की अपील करते हुए, फोरम ने कहा कि जमीनी हकीकत को देखते हुए, अब एलएबी और केडीए यह दावा नहीं कर सकते कि वे पूरे लद्दाख की ओर से बोल रहे हैं।

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