ओडिशा नवीन पटनायक ने एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की
भुवनेश्वर, 14 अगस्त (आईएएनएस)। विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार को 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' के पास होने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आग्रह किया कि वे इस संशोधन का विरोध करने वाला प्रस्ताव पारित करने के लिए ओडिशा विधानसभा का एक आपातकालीन सत्र बुलाएं।
मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में पटनायक ने कहा कि यह कानूनी कदम ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों पर उसके संवैधानिक अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा कि बीजद सांसदों ने राज्यसभा में इस बिल का कड़ा विरोध किया था और इसे राज्य के वित्तीय अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया था।
पटनायक ने आरोप लगाया, "इस बिल में शामिल प्रावधानों का ओडिशा जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, जिससे भारी राजस्व का नुकसान होगा और हमारे राज्य के विकास के एजेंडे में रुकावट आएगी।"
बीजद प्रमुख ने दावा किया कि यह संशोधन, जो धारा 2 के तहत खदानों के नियमन के अलावा 'खनिज-युक्त भूमि' को भी केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाता है, राज्य की भूमि और वित्तीय अधिकार क्षेत्र में दखल को लेकर चिंता पैदा करता है।
पटनायक ने बताया कि धारा 9डी के तहत संशोधन राज्यों की राजस्व शक्तियों को सीमित करता है। यह उन्हें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई भी कर, उपकर (सेस) या इसी तरह का शुल्क लगाने से साफ तौर पर रोकता है, चाहे वह मात्रा, मूल्य या रॉयल्टी पर आधारित हो, सिवाय उन शर्तों के जो केंद्र सरकार ने तय की हों।
विपक्ष के नेता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि धारा 13 में संशोधन केंद्र सरकार को ऐसे नियम बनाने का विशेष अधिकार देता है जो खनिजों पर कर लगाने की राज्य सरकारों की शक्ति को सीमित करते हैं।
पटनायक ने कहा, "ओडिशा की प्राकृतिक संपदा यहां के लोगों की है, और खनन कार्यों से मिलने वाला राजस्व राज्य भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत जरूरी है। अपनी खनिज-युक्त भूमि पर कर और उपकर लगाने की शक्ति राज्य से छीनकर, केंद्र सरकार ने संघवाद और राज्य की राजस्व स्वायत्तता को करारा झटका दिया है।"
उन्होंने मुख्यमंत्री माझी से आग्रह किया कि वे ओडिशा के संघीय अधिकारों और खनिज राजस्व की रक्षा के लिए आम सहमति बनाने के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाएं। साथ ही, उन्होंने ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की ताकि इस संशोधन अधिनियम का विरोध करने और राज्य की शक्तियों को केंद्र सरकार द्वारा हड़पने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जा सके।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह मुद्दा राजनीतिक जुड़ाव से ऊपर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ओडिशा की वित्तीय स्थिरता और भविष्य के विकास को प्रभावित करता है।
पटनायक ने आगे कहा, "अगर केंद्र सरकार खनिज-युक्त भूमि पर राज्य का अधिकार और उपकर लगाने का उसका हक छीन लेती है, तो ओडिशा के पास केवल प्रदूषण, विस्थापन और खनन का बोझ ही रह जाएगा, जबकि इसके फायदे यहां के लोगों से छीन लिए जाएंगे।"
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Created On :   14 Aug 2026 11:59 PM IST












