आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना में संदिग्ध मामलों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई एसआईटी
मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के तहत वर्ष 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
इस संबंध में बुधवार को एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी किया गया। यह फैसला 10 जुलाई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद लिया गया।
एसआईटी का गठन नासिक मंडल आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
जरूरत पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक भी एसआईटी की सहायता करेंगे।
सरकार ने पहले सिविल सर्जनों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को योजनाओं के लाभार्थियों के घर जाकर संदिग्ध दावों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कथित अनियमितताएं कई जिलों में फैली हुई हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र एसआईटी के माध्यम से व्यापक जांच कराने का फैसला किया।
एसआईटी कई पहलुओं की जांच करेगी। इनमें अस्पताल स्तर पर फर्जी या चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक उपचार के दावे, उपचार श्रेणियों को अनुचित तरीके से उच्च स्तर पर दिखाना (अपकोडिंग), अस्पतालों के पैनल में शामिल करने और नवीनीकरण प्रक्रियाओं में अनियमितताएं, संदिग्ध रोगी पंजीकरण, एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर कई दावे, तथा थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, जिला समन्वयकों और अन्य संबंधित पक्षों की संभावित भूमिका शामिल है।
इसके अलावा एसआईटी को दावा स्वीकृति प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और अस्पतालों के पैनल चयन प्रणाली में मौजूद खामियों का अध्ययन कर भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुधार संबंधी सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
सरकारी आदेश के अनुसार, एसआईटी को अपनी जांच पूरी कर 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
मानसून सत्र के दौरान राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने विधानसभा में कहा कि महात्मा फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क और कैशलेस है।
उन्होंने कहा कि मरीजों से 'एक रुपया भी अतिरिक्त' नहीं लिया जाना चाहिए। आबिटकर ने चेतावनी दी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते हुए पाया गया तो उसे तुरंत योजना से बाहर कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर समेत आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ निजी अस्पताल योजना के लाभार्थियों को बेड उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाते हैं। इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड शुरू करने की घोषणा की है।
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Created On :   5 Aug 2026 11:51 PM IST












