ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी जानना जरूरी, नियम न मानने पर परमिट रद्द हो सकता है महाराष्ट्र के मंत्री
मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाईक ने बुधवार को घोषणा की कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए अब बातचीत के लिए बुनियादी मराठी जानना जरूरी होगा। नियम न मानने पर उनके बैज और परमिट सस्पेंड या रद्द किए जा सकते हैं।
मंत्री सरनाईक ने पत्रकारों को बताया कि 20 अगस्त से शुरू होने वाला यह अभियान 1989 के मौजूदा नियमों और 12 अगस्त, 2026 को अपडेट किए गए कानूनी प्रावधानों पर आधारित है। जिन ड्राइवरों में बुनियादी मराठी कौशल की कमी पाई जाएगी, उन्हें पहले भाषा सीखने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। ऐसा न करने पर तीन महीने के लिए बैज सस्पेंड कर दिया जाएगा। मराठी सीखने से लगातार इनकार करने पर ड्राइवर का बैज और ऑपरेटिंग परमिट पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि महाराष्ट्र ने हमेशा रोजगार के लिए देश भर के लोगों का स्वागत किया है, लेकिन राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना सबसे जरूरी है। यह कदम मराठी को 'क्लासिकल भाषा' का दर्जा मिलने के बाद उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि मराठी बोलने से इनकार करने वाले ड्राइवरों को कोई अतिरिक्त मानवीय छूट नहीं दी जाएगी और कानूनी नियमों के तहत सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीओ) अब नए बैज या लाइसेंस जारी करने से पहले नए आवेदकों की मराठी की व्यावहारिक जानकारी की जांच करने के लिए उनके साथ लाइव बातचीत का निरीक्षण और वीडियो-रिकॉर्डिंग करेगी। मंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 9,65,000 से ज्यादा परमिट जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि परमिट पाने के लिए नकली दस्तावेजों के इस्तेमाल की खबरों के बाद, आरटीओ अधिकारियों को मूल निवासी प्रमाण-पत्रों की सख्ती से जांच करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारी और स्थानीय पुलिस इस बात की जांच करेंगे कि क्या आवेदक सच में महाराष्ट्र में जरूरी 15 सालों से रह रहे हैं।
इस प्रवर्तन अभियान का नेतृत्व करने के लिए अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को नियुक्त किया गया है और वे अगले महीने के आखिर तक एक ऑपरेशनल रिपोर्ट सौंपेंगे।
भाषा के सख्ती से पालन के साथ-साथ, मंत्री सरनाईक ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए आनंद दिघे कॉर्पोरेशन के तहत कल्याणकारी योजनाओं पर भी जोर दिया। 37,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड सदस्यों वाले इस कॉर्पोरेशन ने ड्राइवरों के कल्याण के लिए 57 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इन फायदों में छात्रों के लिए योजनाएं, 65 साल की उम्र पूरी होने पर ड्राइवरों को 10,000 रुपए का अनुदान और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक मदद शामिल है।
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Created On :   19 Aug 2026 11:51 PM IST












