संसद परिसर में मानसून सत्र के आखिरी दिन एनडीए और विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

संसद परिसर में मानसून सत्र के आखिरी दिन एनडीए और विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी दलों के सांसदों ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए और मानसून सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को संसद के मकर द्वार पर एक बार फिर आमने-सामने आ गए।

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी दलों के सांसदों ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए और मानसून सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को संसद के मकर द्वार पर एक बार फिर आमने-सामने आ गए।

जहां विपक्षी सांसदों के एक वर्ग ने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी से संबंधित तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। वहीं अन्य सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद से "अनुपस्थिति" पर सवाल उठाने वाली तख्तियां पकड़ी हुई थीं।

दूसरी ओर, एनडीए सांसदों ने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाते हुए तख्तियां लेकर नारे लगाए।

बुधवार को संसद में उनकी उपस्थिति की विपक्ष की निरंतर मांग के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह नीट पेपर लीक मुद्दे पर 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के संबंध में हर बात का जवाब देने के लिए तैयार हैं, जबकि उन्होंने विपक्ष पर जानबूझकर चर्चा को रोकने का आरोप लगाया।

हालांकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बहस के प्रस्ताव को टालने की कोशिश करते हुए कहा कि विपक्ष को गृह मंत्री की कल्पनाओं या उपदेशों में कोई दिलचस्पी नहीं है और उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यह जानना चाहती है कि उन पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, "विपक्ष पूरी तरह से नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए हुए हैं। पूरा मानसून सत्र हंगामे और गतिरोध के भेंट चढ़ा दिया। रोज गोल-पोस्ट बदले इनकी मंशा कभी सदन को चलाने की थी ही नहीं। मैं समझती हूं इससे ज्यादा नकारात्मक विपक्ष हमने पहले कभी नहीं देखा।"

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आगे कहा, "यह बहुत दुख की बात है कि हमारे देश में विपक्ष ने इस समय पूरी तरह से नकारात्मक रवैया अपनाया है। उन्होंने पूरे मानसून सत्र को हंगामे, शोर-शराबे और गतिरोध की भेंट चढ़ने दिया।

कल हमारे संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में साफ कहा कि उन्हें 'वेल' (सदन के बीच के हिस्से) से अपनी सीटों पर वापस आ जाना चाहिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। वे जिस भी विषय पर चर्चा करना चाहें, हम उसके लिए तैयार हैं। गृह मंत्री चर्चा में शामिल होने, उनकी सभी बातें सुनने और अपना बयान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन पहले दिन से ही उनकी सोच साफ थी। उनकी सदन को चलने देने की कोई मंशा नहीं थी। मेरा मानना ​​है कि हमने पहले कभी इतना नकारात्मक विपक्ष नहीं देखा।"

इसी बीच, गुरुवार को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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Created On :   13 Aug 2026 12:30 PM IST

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