नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक जेल से हुए रिहा

नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक जेल से हुए रिहा
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया। उन्होंने जेल में 13 दिन बिताए थे।

काठमांडू, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया। उन्होंने जेल में 13 दिन बिताए थे।

इन दोनों को 28 मार्च को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो पिछले साल सितंबर में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों को दबाने से जुड़ा था। इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी और इसे 'दोषपूर्ण हत्या' का मामला माना गया था।

केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक के परिवारों की ओर से दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका' पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि काठमांडू जिला अदालत की ओर से दी गई पांच दिन की अतिरिक्त रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद, गुरुवार तक इन दोनों को रिहा कर दिया जाए।

सोमवार को जारी अदालत के आदेश में कहा गया था कि जांच पूरी करें और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें, या 'राष्ट्रीय आपराधिक प्रक्रिया संहिता' के अनुसार केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को हिरासत से रिहा करें।

पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था।

ओली ने फेसबुक पर लिखा कि हालाँकि सरकार ने मेरे खिलाफ पक्षपातपूर्ण और बदले की भावना से आपराधिक आरोप लगाए और मुझे 13 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा, लेकिन आखिरकार मुझे रिहा कर दिया गया, क्योंकि सरकार इस मामले में मुझ पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत पेश करने में विफल रही।

हालाँकि, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनी खराब सेहत के कारण वे इलाज के लिए कुछ और दिनों तक अस्पताल में ही रहेंगे।

बता दें कि ओली और लेखक की गिरफ़्तारी, 'विशेष अदालत' के पूर्व अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले एक आयोग की सिफारिश के बाद हुई। इस आयोग का गठन पिछले साल 8 और 9 सितंबर को नेपाल में जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए किया गया था।

आयोग ने सिफ़ारिश की थी कि केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक और पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग पर 'राष्ट्रीय दंड संहिता' की धारा 181 और 182 के तहत 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाया जाए। अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।

सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, जेन-जी आंदोलन के दौरान 77 लोगों की जान चली गई थी, और 84 अरब नेपाली रुपये से अधिक की सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

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Created On :   9 April 2026 11:35 PM IST

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